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लोकायुक्त को मिला रिविजन का अधिकार

पटना (हि.ब्यू.)। लोकायुक्त को रिविजन का अधिकार मिल गया है। सोमवार को विधानसभा ने इस संबंध में बिहार लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक 2012 को अपनी मंजूरी दे दी। विधेयक में नयी धारा 22 (2 झझ) जोड़ते हुए कुप्रशासन शब्द को परिभाषित किया गया है। अगर किसी कार्रवाई से किसी परिवादी या किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है तो लोकायुक्त लिखित रिपोर्ट के द्वारा संबंधित लोक सेवक या प्रधिकार से यह अनुशंसा करेगा कि वह अन्याय का समाधान समय सीमा के भीतर करे।

सदन में संसदीय कार्य मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने विधेयक पेश किया। इस पर राजद की ओर से चन्द्रशेखर और दुर्गाप्रसाद सिंह ने संशोधन का प्रस्ताव दिया जिंसे सदन ने ध्वनि मत से खारिज कर दिया। दुर्गाप्रसाद सिंह का सुझाव था कि विधेयक में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लिंग विभेदीकरण शब्द को जोड़ा जाए।

संशोधन विधेयक में कुप्रशासन शब्द को परिभाषित किया गया है। इसका अर्थ ऐसी कार्रवाई से है जो प्रशासिनक प्रक्रिया, पद्धति, अयुक्तियुक्त, अन्यायपूर्ण, सताने वाली या अनुचित रूप में विभेदकारी हो। अथवा वैसी कार्रवाई जिंसमें उपेक्षा या प्रशासिनक प्रक्रिया में विलंब हुआ हो। इसी प्रकार लोकायुक्त मामले की जांच कर सकता है या मामला जांचयोग्य हो तो उसकी राज्यपाल को भी दे सकता है।

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