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अब मेट्रो भी चलेगी ऑटोमैटिक

मेट्रो फेस-3 की लाइन 7 व आठ पर चलने वाली सभी ट्रेन पूरी तरह से ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन (एटीओ) के तहत चलाई जाएंगी। इस तकनीक पर आधारित ट्रेन को बिना ड्राइवर के चलाया जा सकता है। हालांकि बिना ड्राइवर के ट्रेन चलाने की फिलहाल डीएमआरसी की योजना नहीं है। लेकिन द्वारका-नोएडा-वैशाली रूट पर लगातार आ रही गड़बड़ी को देखते हुए मेट्रो प्रबंधन नई लाइन पर नई तकनीक को अपनाने के काम जुट गया है। ताकि भविष्य में किसी खराबी के कारण यात्रियों को कम से कम दिक्कत का सामना करना पड़े। इतना ही नहीं पहले से चल रही ट्रेन की तकनीक में परिवर्तन करते हुए सभी को 2016 तक पूरी तरह से ऑटोमैटिक कर दिया जाएगा।

डीएमआरसी के निदेशक(परिचालन)राज कुमार ने बताया कि अब तक ट्रेन में ऑटोमैटिक ट्रैफिक सिस्टम अथवा ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोसेस(एटीपी) के जरिये ट्रेन चलाई जाती है। इसमें निर्देशों का पालन करने के लिए ड्राइवर का मौजूद होना जरूरी होता है। ऐसे में जरा भी गड़बड़ी होने पर इमरजेंसी ब्रेक लग जाते हैं।

जिसके बाद ड्राइवर अपने विशेष फोन नंबर के माध्यम से ट्रेन को मैन्युअल मोड पर चलाने की इजाजत लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम पांच से दस मिनट तक का वक्त लग जाता है। यदि गड़बड़ी होती है तो उसे मालूम करने में भी समय खर्च होता है। ऐसे में न चाहते हुए भी ट्रैक पर ट्रेन को रोकना पड़ जाता है। इन्हीं बातों को देखते हुए मेट्रो के फेस-3 के दौरान तैयार होने वाली लाइन सात व आठ पर एटीओ ट्रेन चलाई जाएगी। न केवल यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से यह ट्रेन बेहतर है, बल्कि तकनीकी गड़बड़ी अथवा अन्य कोई खामी होने पर भी यह ट्रेन यात्रियों को सुरक्षित स्टेशन तक पहुंचाने के बाद रुकेगी।

 

बाक्स::
लाइन सात पर है


मुकुंदपुर से यमुना विहार-54 किलोमीटर
लाइन-8

जनकपुरी- बोटेनिकल गार्डन-36 किलोमीटर
इसके अलावा हेरीटेज लाइन के रूप में केंद्रीय सचिवालय से कश्मीरी गेट और केंद्रीय सचिवालय से बदरपुर के बीच भी इस ट्रेन को चलाने की योजना है। जिसे आगे बढ़ाते हुए फरीदाबाद तक ले जाया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार लाइन तीन व चार(द्वारका-नोएडा-वैशाली) पर चलने वाली ट्रेन की तकनीक को बदलने का काम भी शुरू किया जा रहा है। इसे भी एटीओ तकनीक पर आधारित किया जाएगा।

क्या व्यवस्था है अभी
मेट्रो की मौजूदा लाइनों पर ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोसेस के जरिये ट्रेन चलाई जाती है। जिसमें ड्राइवर को ट्रैफिक सिस्टम के निर्देशों का पालन करना होता है।

क्या होगी नई व्यवस्था
नई व्यवस्था में ड्राइवर के बिना मेट्रो मंजिल तक पहुंच सकेगी और गड़बड़ी होने पर उसे कंट्रोल रूम से भी ऑपरेट करके नजदीकी मेट्रो स्टेशन तक बिना रुके पहुंचाया जा सकेगा। हालांकि मेट्रो को ड्राइवर के बिना चलाने की फिलहाल कोई योजना डीएमआरसी ने नहीं बनाई है। ट्रैक सर्किट सिस्टम में होने वाले परिवर्तन का लाभ भी नई व्यवस्था में और कारगर होगा, क्योंकि ट्रैक पर सिग्नलिंग के बदलने से ट्रेन की रफ्तार पर असर भले ही नहीं पड़ेगा, लेकिन दूर तक देखने और स्टेशन तक कम समय में पहुंचने में मदद अवश्य मिलेगी।

क्या होगा लाभ
किसी भी वजह से ड्राइवर की नासमझी के कारण ट्रेन अथवा यात्री लेट नहीं होंगे। तकनीकी खराबी की सूचना ट्रैक सर्किट सिस्टम के माध्यम से ट्रेन के मुख्य कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी और स्पीड अपने आप कम हो जाएगी, जिससे किसी भी तरह से दुर्घटना का अंदेशा नहीं रहेगा। इसके बाद ट्रेन बिना रुके नजदीकी स्टेशन पर पहुंच जाएगी। जबकि एटीपी व्यवस्था में तकनीकी गड़बड़ी के बाद लोगों को दिक्कत ङोलनी पड़ती है। क्योंकि मैन्युल मोड पर आने के बाद भी ड्राइवर को दो बार एक ही प्रक्रिया करनी पड़ती है।

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  • Web Title:अब मेट्रो भी चलेगी ऑटोमैटिक