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आशीर्वाद का रहस्य

खुशी दो प्रकार की होती है। एक, प्राप्ति की और दूसरी, देने की। हमारे बचपन में हम प्राप्ति की खुशी का अनुभव करते हैं। यदि आप बच्चों को कुछ देते हैं, तो वे हमेशा लेने के लिए तैयार होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम एक और खुशी का अनुभव करते हैं, वह क्या है? देने में आनंद। उदाहरण के लिए, घर में मां या दादी हैं, जब दादी घर में अकेली हों, तो वह खुद के लिए पांच विभिन्न प्रकार की सब्जियां और चार अलग-अलग मिठाइयां तैयार नहीं करतीं। लेकिन जब बच्चे घर में आते हैं या मेहमान आते हैं, तो वह नाना प्रकार के पकवान परोसती हैं। तो देने में एक खुशी है और यह एक परिपक्व खुशी है। लेकिन बहुत बार हम इसकी दृष्टि खो देते हैं और हम जीवन में कुछ पाने की तलाश में रहते हैं। ऐसे में हम असंतुष्ट और दुखी रहते हैं। धन प्राप्ति के लिए मन संतुष्ट होना चाहिए। जितना अधिक संतुष्ट मन, उतनी ही अधिक प्रगति। एक संतुष्ट व्यक्ति  जब दूसरों को आशीर्वाद देता है, तो उसका आशीर्वाद प्रभावी होता है। यह आशीर्वाद का रहस्य है।

कुछ लोग उदारता से आशीर्वाद देते हैं। मैं आशीर्वाद देने में कृपणता नहीं करता, मैं बहुत खुले दिल से आशीर्वाद देता हूं। लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए भी योग्यता की आवश्यकता है। अपने मन को साफ रखने की आवश्यकता है। अपने मन को शुद्ध कैसे रखें? जब आप प्राणायाम और ध्यान करेंगे, तो मन बिल्कुल साफ हो जाएगा। वर्तमान में रहें। जो कुछ भी अतीत में है, उसे छोड़ दें। बैठकर ध्यान करें। अपने भीतर इस विश्वास को जगाएं कि इस वर्तमान क्षण में मैं शुद्ध हूं, मैं प्रबुद्ध चेतना हूं, मैं परमात्मा हूं। जब हम हर दिन प्राणायाम करते हैं, हमारे जीवन में एक नई लहर पैदा होती है, खुशी, संतोष और आनंद की लहर। इसे ही मैं जीवन जीने की कला कहता हूं।

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