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हड़ताल से तौबा

आए दिन देश के किसी न किसी कोने से बंद, हड़ताल व धरना-प्रदर्शन की धमकी मिलती रहती है। यह लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। हमें समझना होगा कि बंद और हड़ताल किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि अपने आप में समस्या हैं। काम रोकने से देश की अर्थव्यवस्था डगमगाती है, अराजक व अपराधी तत्वों को गड़बड़ी फैलाने का मौका मिलता है और राजनीति करने वाले इस पर सियासी रोटियां सेंकते हैं। वैसे भी अपने यहां त्योहारों के चलते काफी सारी छुट्टियां होती हैं। फिर सिविल सोसायटी के आंदोलन व अनशन के नाम पर भी लोग दफ्तरों के कामकाज छोड़कर छुट्टियां लेने लगे हैं। बीच-बीच में राजनीतिक पार्टियों व मजदूर संगठनों द्वारा भी बंद का आह्वान किया जाता है। इसलिए जरूरी हो गया है कि बंद और हड़ताल के खिलाफ देश में कानून बनाया जाए।
रावत गर्ग, बाड़मेर, राजस्थान

करों में कटौती हो
गोवा के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने पेट्रोल पर टैक्स का बोझ कम करके एक नई आर्थिक नीति को जन्म दिया है। इस कदम के लिए वह यकीनन बधाई के पात्र हैं। आज जब पूरे देश में पेट्रोल की कीमतें उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं, तब निश्चित रूप से गोवा प्रदेश के लोग चैन की सांस ले रहे होंगे। एक बात और। अगर टैक्स कम हो, तो टैक्स की चोरी भी कम होगी। इसके अलावा पेट्रोलियम पदार्थों में मिलावट के मामले भी कम आएंगे। केंद्र सरकार को गोवा सरकार से सबक लेते हुए कुछ इसी तरह के फैसले लेने होंगे, तभी जनता को महंगाई से राहत मिलेगी। यह तो जग जाहिर है कि पेट्रोल अब हमारी दैनिक जरूरत है। अगर विश्व बाजार में तेल के दाम नहीं घट रहे हैं, तो करों में कटौती करके इसके दाम स्थिर रखे जा सकते हैं। यही जनहित में है।
कृष्ण मोहन गोयल, 113, बाजार कोट, अमरोहा

नैतिकता का पतन
कर्नाटक विधानसभा में कथित तौर पर पोर्न फिल्म देखते हुए कुछ विधायक कैमरे में कैद हुए थे। इस घटना से न केवल विधायकों की गरिमा गिरी है, बल्कि सांविधानिक संस्थाओं की मर्यादा को भी चोट लगी है। आखिर, जनता के ये पवित्र सदन उनकी समस्याओं को सुनने व उनका समाधान ढूंढ़ने के लिए हैं। लेकिन इस तरह के आचरण से मतदाताओं का अपमान हुआ है। वैसे मंत्रियों का यह आचरण कोई हैरत की बात नहीं है। चुनाव जीतने के बाद अक्सर नेताओं के आवास पर जश्न का माहौल रहता है और वहां अश्लील नृत्य कराया जाता है। नेता और उनके समर्थक हवाई फायरिंग करते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में इस तरह के मामले कई बार सामने आए हैं। हमारे जन-प्रतिनिधि इसी तरह की हरकतें करते रहेंगे, तो जनता का भरोसा उनसे उठ जाएगा। जरा सोचिए, टीम अन्ना का पदार्पण क्यों हुआ?
विजय लोढ़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़

बढ़ता लाल गलियारा
वाकई, आतंकवाद से बड़ी समस्या बन गया है नक्सलवाद। हम एकजुट हो जाएं, तो आतंकवाद से निपट सकते हैं, क्योंकि इसके सूत्र बाहरी हैं। परंतु नक्सली तो हमारे अपने हैं, उनसे कैसे निपटा जाए? बंदूक से या बातचीत से? महात्मा गांधी ने काफी पहले कहा था कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। जब हमारी सेना व पुलिस बंदूक उठाएगी, तो नक्सली भी जवाबी कार्रवाई करेंगे। फिर क्या होगा?  इस हिंसा का अंत क्या होगा? इसलिए बेहतर होगा कि केंद्र सरकार संविधान के दायरे में नक्सलियों से बातचीत करे। उनकी मांगों पर गौर करे और उन्हें संतुष्ट कर आत्म-समर्पण कराए।
दीपक बंसल, कौशांबी, गाजियाबाद

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