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जगन के खिलाफ जांच जारी रखने की अनुमति मांगी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक विशेष अदालत से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता वाईएस जगनमोहन रेड्डी की अवैध सम्पत्ति मामले की जांच जारी रखने की अनुमति मांगी।

इस मामले में जगन एवं अन्य 12 लोगों के खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल करने के दो दिन बाद जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में एक ज्ञापन पेश किया जिसमें जांच जारी रखने की अनुमति मांगी गई है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई नौ अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।

केंद्रीय जांच एजेंसी जगन और अन्य लेगों तथा कम्पनियों के खिलाफ कुछ और आरोपपत्र दाखिल करने की योजना बना रही है। जगनकडप्पा से सांसद हैं और दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के बेटे हैं।

पहले आरोप पत्र में अरविंदो फार्मा और हेट्रो ड्रग्स के नाम लिए गए हैं। आरोप है कि इन कम्पनियों ने जगन की फर्मो में निवेश किया, जिसके एवज में इन्हें जगन के पिता एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा भूमि आवंटित की गई। सीबीआई ने पिछले वर्ष अगस्त में जगन और अन्य 73 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बताया जाता है कि सीबीआई की योजना जगन तथा अन्य कम्पनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की है। आरोप है कि इन कम्पनियों ने भारी लाभ की उम्मीद में जगन के व्यवसाय में निवेश किया।

जगन ने 2010 में कांग्रेस छोड़कर एक नई पार्टी गठित कर ली थी। अभी उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उनके वित्तीय सलाहकार एवं अंकेक्षक विजय साई रेड्डी इस मामले में गिरफ्तार होने वाले एकमात्र शख्स हैं। सीबीआई ने शनिवार को 68 पृष्ठों का आरोप पत्र दायर किया था जिसमें 263 सहायक दस्तावेज शामिल किए गए थे। इसमें 68 गवाहों का जिक्र किया गया था। दो ट्रक में भरकर दस्तावेज अदालत परिसर में लाए गए थे।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात जैसे आरोप लगाए गए। इस मामले में एक अन्य अभियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बीपी आचार्य एम्मार मामले में पहले से ही जेल में हैं।

सीबीआई ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर पिछले साल अगस्त में जगन और 73 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालांकि आरोप पत्र में 13 लोगों अथवा कम्पनियों को ही शामिल किया गया है। इस बीच जगन और विजय साई रेड्डी के वकील अशोक रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा कि जगन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कोई धारा नहीं लगाई गई है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप दायर किए गए हैं।   

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