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गंगा की अविरलता को धार देने में जुटी है भाजपा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राम मंदिर मुद्दे को भुनाने में एक बार फिर नाकाम होने के बाद अब गंगा की अविरलता को धार देने और उसमें अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने में जुट गई है।

वर्षों तक राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा विधानसभा चुनाव में अयोध्या की सीट तक नहीं बचा पाई और उसके कद्दावर नेता लल्लू सिंह को एक नौसिखिए उम्मीदवार से मात खानी पड़ी। राम की नगरी अयोध्या में हार का स्वाद चखने वाली भाजपा को भी अब महसूस होने लगा है कि राम मंदिर मुद्दे के सहारे अब करोड़ों हिन्दुओं के दिलों में पैठ नहीं बनायी जा सकती।

शायद इसीलिए भाजपा अब गंगा कि अविरलता और स्वच्छता के मुद्दे को लोकसभा चुनाव से पहले धार देना चाहती है, ताकि चुनाव आते-आते इस मुद्दे का हर सम्भव राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।

भाजपा के रणनीतिकार हालांकि मानते हैं कि गंगा की अविरलता का मुद्दा धर्म की बजाय पर्यावरण एवं स्वच्छता से जुड़ा है और इस मुद्दे पर किसी भी धर्म या समुदाय को किसी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

भाजपा के एक नेता कहते हैं कि गंगा की अविरलता का मुद्दा विवादित नहीं है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे करोड़ों हिन्दुओं के साथ ही संत समाज के दिलों में भी आसानी से जगह बनाई जा सकती है।

ज्ञात हो कि विधानसभा चुनाव के दौरान संतों ने भाजपा के घोषणा पत्र को दिल्ली में सिर्फ इसलिए जलाया था क्योंकि उसमें राम मंदिर बनाने का संकल्प व्यक्त किया गया था। राम मंदिर मुद्दे को लेकर संत समाज ने काफी ऐतराज जताया था।

वह कहते हैं, ''कानुपर और आगरा जैसे कुछ शहरों में जो बूचड़खाने चलाए जाते हैं, वे ज्यादातर गंगा के किनारे ही हैं और इससे भी गंगा की अविरलता और स्वच्छता को काफी नुकसान पहुंचता है। लेकिन इस मामले में बूचड़खानों में ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर काफी हद तक गंगा को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।''

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने भी शनिवार को एक बयान जारी कर गंगा की अविरलता के प्रति पार्टी का संकल्प दोहराया था। उमा भारती पहले से ही इस अभियान से जुड़ी हुई हैं। शाही ने बयान में कहा था कि संतों द्वारा लगातार गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। इस तरह के काम में भाजपा अपनी सहभागिता देती रहेगी।

भाजपा गंगा की अविरलता के मुद्दे को कितनी गम्भीरता से ले रही है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाही ने स्वयं वाराणसी के अपने सभी विधायकों श्यामदेव राय चौधरी, ज्योत्सना श्रीवास्तव, रवींद्र जायसवाल, अशोक धवन और केदार सिंह को यह निर्देश दिया है कि वे गंगा की अविरलता को लेकर अनशन कर रहे साधुओं से मिलकर इस आंदोलन के प्रति अपना संकल्प व्यक्त करें।

इस सम्बंध में भाजपा प्रदेश इकाई के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा, ''भाजपा जन-भावनाओं से जुड़े मुद्दे हमेशा उठाती रही है और उसके एजेंडे में गाय, गंगा व धर्म-संस्कृति जैसे मुद्दे हमेशा से रहे हैं।'' पाठक बड़ी साफगोई से कहते हैं, ''हर विषय राजनीति का मुद्दा नहीं होता। भाजपा समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए जनभावनाओं को ध्यान में रखकर लोगों से जुड़े मुद्दे उठाती रही है।''

भाजपा के अलावा कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) इस मुद्दे पर जहां किसी तरह की बयानबाजी से बच रही हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने गंगा की अविरलता के मुद्दे पर संतों के साथ खड़ा होने का संकल्प दिखाया है।

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अभयानंद शुक्ल ने बताया, ''भाजपा मुद्दों की तलाश में है और उसे लगता है कि गंगा की अविरलता और स्वच्छता के मुद्दे पर सभी धर्म और संप्रदाय के लोग एक साथ खड़े होंगे। भाजपा लोकसभा चुनाव तक इस मुद्दे को धार देना चाहती है ताकि इसका हर सम्भव फायदा उठाया जा सके।''

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  • Web Title:गंगा की अविरलता को धार देने में जुटी है भाजपा