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कितना प्यारा.. जाइंट पांडा

सॉफ्ट टॉयज की दुनिया में मशहूर पांडा असल जीवन में काफी आलसी होता है। लंबे समय तक यह सोता रहता है। लेकिन दुख की बात यह है कि आज इसके अस्तित्व को खतरा है। यह विलुप्त होने की कगार पर है। पांडा से जुड़ी कई खास बातें तुम्हें बता रही हैं रजनी अरोड़ा

जाइंट पांडा दुनिया के नायाब स्तनधारी जानवरों में से एक है, जो अपने विशाल, गोल-मटोल और भारी शरीर के बावजूद सदियों से हमारे दिल में जगह बनाए हुए है। सॉफ्ट टॉयज में इसे सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। पांडा का शरीर सफेद रंग का होता है, लेकिन ये अपनी आंखों के चारों ओर काले घेरों, बड़े गोल कानों, कंधे, छाती, टांगों और पैरों के आसपास काले पैच के कारण पहचाने जाते हैं।

पांडा को चीनी भाषा में ‘झूयांगमाओ’ या विशालकाय बिल्ली भालू कहते हैं। ये केवल एशिया में पाए जाते हैं। ये चीन के बांस के जंगलों और तिब्बत के हिमालय पर्वत के ढलानों के पेड़ों पर रहते हैं। पांडा एलूरोपोडा प्रजाति के हैं, जो करीब आठ लाख साल पुरानी है। चीनी इतिहास में इनका जिक्र किया गया है। उस समय के राजा अपने दरबार में इनकी खाल रखते थे। ऐसा माना जाता था कि यह बुरी आत्माओं को भगाने और बाढ़, भूकंप आदि से बचाने में सक्षम थे। सफेद पांडा की पहचान एक फ्रेंच मिशनरी प्रकृतिवादी पेरे जीन पियरे र्आमड डेविड ने सन् 1869 में की थी। आज पांडा विश्व वन्यजीव कोष ( वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फेडरेशन - डब्ल्यू डब्ल्यू एफ) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित प्रजातियों में से एक है।

पांडा 25-30 साल तक जिंदा रहते हैं। पांडा के शरीर पर सफेद और काले रंग के मोटे ऊ नी फर होते हैं, जो न केवल उन्हें बर्फ या चट्टानी वातावरण में आसानी से छिपा सकते हैं, बल्कि उन्हें गर्मी भी देते हैं। सफेद पांडा कार्निवोरा जानवर है। ये अधिकतर बांस और जंगली पौधे खाते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर मरे हुए चूहे, खरगोश, मछली जैसे छोटे जानवर भी खा लेते हैं। इन्हें शहद बहुत पसंद होता है। इसके लिए ये जहरीली मधुमक्खियों से भी नहीं डरते। इनके मुंह में 42 दांत और काफी मजबूत मांसपेशियों वाले जबड़े होते हैं, जिनसे ये बांस के कठोर डंठल को भी आसानी से चबा लेते हैं। मादा पांडा, नर की तुलना में छोटी और कम वजन की होती है। जहां वयस्क नर पांडा की लंबाई 120-190 सेंटीमीटर, ऊंचाई 5-6 फीट और वजन 100-130 किलोग्राम होता है, वहीं मादा पांडा लगभग 90 सेंटीमीटर लंबी, 4-5 फीट ऊंची और करीब 100 किलोग्राम वजन की होती है। इतने बड़े पांडा की पूंछ केवल 5-7 इंच की होती है। पांडा के पंजे में पांच नोंकदार उंगलियों के अलावा एक अतिरिक्त हड्डी भी होती है, जो अंगूठे का काम करती है। अपने इस पंजे की मदद से ये बांस को मजबूती से पकड़ कर छील लेते हैं। इनके पैर फ्लैट होते हैं। पांडा चुप रहने वाले, शर्मीले स्वभाव के और अकेले रहने वाले जानवर हैं। ये रात में ही ज्यादा हरकत करते हैं। दिन भर गुफाओं, खोखले पेड़ों और घनी झाड़ियों में रहते हैं। सर्दी के मौसम में ये इन्हीं खोखले पेड़ों में लंबे समय के लिए सो जाते हैं।

लुप्त होने की कगार पर
सफेद पांडा का अस्तित्व खतरे में है। इन्हें लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है। इसका कारण है, पांडा की धीमी प्रजनन दर के साथ-साथ वनों के कटाव, कृषि, ग्लोबल वार्मिग और अवैध शिकार।

12-16 घंटे तक खाते रहते हैं पांडा दिन भर में
30-40 पाउंड बांस हर रोज खा सकते हैं पांडा
5-6फीट औसतन ऊंचाई होती है युवा पांडा की
1600से कम पांडा बचे हैं पूरे विश्व भर में

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