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चुइंग गम....ये है बड़े काम की चीज

चुइंग गम को घंटों चबाते रहना और फुलाकर बबल गम बनाना तो तुम्हारी आदतों में शुमार हो गया होगा अब तक। चुइंग गम को दिन में दो या कभी-कभी तीन बार तो तुम खा ही लेते होगे। जानते हो ये कैसे बनी थी? चुइंग गम की कहानी बता रहे हैं प्रसन्न प्रांजल

कैसे बनी चुइंग गम
चुइंग गम एक विशेष प्रकार के पेड़ के दूध से बनती है। इसे टेस्ट देने के लिए फ्लेवर और शुगर बाद में मिलाया जाता है। चुइंग गम बनने की कहानी काफी मजेदार है। न्यू जर्सी का एक व्यापारी थॉमस एडम्स था। वह सापोडिला नाम के पेड़ से प्राप्त दूध से सिंथेटिक रबर बनाता था। उस रबर से वह खिलौने, मास्क, बरसाती जूते और साइकिल के टायर बनाता था। एक दिन रबर के एक टुकड़े को उठाकर उसने अपने मुंह में डाला और चबाने लगा। रबर का स्वाद एडम्स को अच्छा लगा। उसने सोचा, क्यों न इसमें कुछ फ्लेवर मिलाया जाए। अपनी इस सोच को वो सच्चाई में बदलने के लिए जुट गया और चुइंग गम बना डाली।

समय के साथ बदलती गयी
शुरुआती दिनों में चुइंग गम मीठी होती थी, लेकिन इसमें किसी तरह की कोई खुशबू नहीं होती थी। बाद में उत्तरी अमेरिका के एक डेंटिस्ट विलियम रीगल ने इसके रूपरंग और स्वाद में बदलाव किया। इसमें अलग-अलग तरह के फूल और फलों की खुशबू को मिलाकर बाजार में उतारा। इसके बाद डॉ. सी मैन ने चुइंग गम में ‘पैपासीन’ नामक पदार्थ मिलाया और इसे और भी सुगंधित बना दिया। ‘पैपासीन’ न सिर्फ एक सुगंधित पदार्थ था, बल्कि यह पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद भी था।

पूरी दुनिया में हुई मशहूर
समय बदलने के साथ-साथ ये पूरी दुनिया में मशहूर हो गई। इंग्लैंड, यूरोप और एशिया में लोग इसके दीवाने हो गए। समय के साथ-साथ चुइंग गम नए-नए स्वादों, सुगंधों व आकार-प्रकार में बनने लगी।

आज ऐसे बनती है..
पहले यह ‘सापोडिला’ पेड़ से बनाई जाती थी, पर आजकल चुइंग गम निर्माण के लिए ‘गुड़ा सिपैक’ नामक प्रजाति के पेड़ों व लताओं के गोंद का इस्तेमाल किया जाता है। पहले इसे हाथ से बनाया जाता था, अब इसे बनाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल होता है।

कैसे तैयार होती है
चुइंग गम बनाने के लिए सिपैक के कच्चे गोंद, खुशबू और दूसरे कई पदार्थों का मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद बड़ी मशीनों द्वारा इसे खूब मिलाया जाता है। बाद में यह पदार्थ एक लम्बी छड़ की शक्ल में
तैयार हो जाता है। तब इसे गोल, चौकोर, तिकोने आकारों में मशीनों के जरिए काट लिया जाता है। चुइंग गम में ताजगी और स्वाद को बनाए रखने के लिए उसे पैकिंग वायु रोधी (एयरटाइट) कागजों में सील किया जाता है।

बड़े काम की चीज
हवाई जहाज के यात्रियों को वायु-दाब तथा अन्य असुविधाओं से बचाने के लिए बढ़िया किस्म की चुइंग गम दी जाती हैं। मुंह की बदबू को दूर करने और सांसों में खुशबू बनाए रखने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है। इसे चबाने से दांतों व जबड़ों का अच्छा व्यायाम हो जाता है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा या दिनभर चुइंग गम खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए तुम सभी को ज्यादा चुइंग गम नहीं खानी चाहिए। 

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