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दिमाग तेज बना देगा चेस

दिमाग तेज बना देगा चेस

‘चेस’ एक ऐसा खेल है, जिससे दिमाग का काफी विकास होता है। गर्मी की दोपहरी में घर बैठे इसे खेल कर इंटेलिजेंट बनोगे और बोर भी नहीं होगे

‘चेस’ यानी शतरंज की शुरुआत भारत में हुई। इसे कई हजार सालों से खेला जा रहा है। पहले इसका नाम था ‘चतुरंग’। फिर 7वीं शताब्दी में पशिर्या के लोगों ने इसे अपनाया और शतरंज नाम दिया। 1200 ई. के आसपास शतरंज के नियमों में बदलाव दक्षिण यूरोप में किया गया।

19वीं शताब्दी तक आते-आते चेस काफी प्रचलित हो गया और इसके ऊपर अनेक किताबें लिखी गईं और क्लब बने। पहला आधुनिक चेस टूर्नामेंट इंग्लैंड के प्रसिद्ध खिलाड़ी होवार्ड ने 1851 में लंदन में किया, जिसे लंदन के एडोल्फ एंडरसन ने जीता। 19वीं शताब्दी के अंत तक अनेक मास्टर टूर्नामेंट और मैच खेले गए। 1914 में चेस ग्रैंडमास्टर टाइटल शुरू किया गया। 1924 में वर्ल्ड चेस फेडरेशन की स्थापना पेरिस में हुई। 1927 में महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप का आरंभ हुआ। इसके बाद चैंपियनशिप का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें दो महान खिलाड़ी कारपोव और गैरी का मुकाबला हुआ, जिसमें गैरी की जीत हुई और वह वर्ल्ड चैंपियन बन गया। 2007 में गैरी को भारत के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने हराया और वह दुनिया के नंबर1 खिलाड़ी बन गए।

ऐसे खेलते हैं...
चेस दो खिलाड़ियों द्वारा चेस बोर्ड पर खेला जाता है। इसमें 64 खाने होते हैं, जो 8/8 के होते हैं। हर खिलाड़ी 16 मोहरों के साथ खेलता है, जिनमें एक राजा (किंग), एक वजीर (क्वीन), 2 घोड़े (नाइट), 2 हाथी (रूक), 2 ऊंट (बिशप) और 8 सिपाही (पॉन) होते हैं। हर मोहरे की अपनी चाल होती है। जैसे घोड़ा ढाई चाल चलता है। अपने राजा को बचाने के लिए ही पूरा गेम खेला जाता है। जो दूसरे के राजा को पहले मारेगा वही जीतेगा। इस गेम को तीन फेज में खेलते हैं। पहला शुरुआती गेम, जिसे ओपनिंग कहा जाता है, फिर बीच का मिडल गेम, अंत का एंड गेम।

हमारे देश में..
भारत में ऑल इंडिया चेस फेडरेशन है, जो 1951 में चेन्नई में बनाया गया था।

इसके फायदे ये हैं.

प्लानिंग, विश्वास, अनुशासन सीखते हो।
यह फैसले लेने की क्षमता का विकास करता है।
चेस गहराई से सोचने और खोज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है।
कल्पना का विकास होता है, जो भविष्य के बारे में सोचने की क्षमता को बढ़ाता है। क्या सही क्या गलत आगे क्या करना सही रहेगा, यह सोचते हो।
चेस खेलने से गणित और विज्ञान विषयों पर अच्छी पकड़ बनती है।

भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी
विश्वनाथन आनंद (विश्व-विख्यात भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी)
दिब्येंदु बरुआ (भारत का दूसरा ग्रैंडमास्टर)
कोनेरू हम्पी (यह भारत की दूसरी ग्रैंडमास्टर फीमेल प्लेयर हैं)
परिमाजर्न नेगी (युवा ग्रैंडमास्टर)
पी. हरिकृष्ण (युवा ग्रैंडमास्टर)

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