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संन्यास के बाद सुर्खियां बटोरने की कोशिश

इस बार आईपीएल में जिन बातों पर खास नजर रहेगी, उनमें से सबसे अहम है सौरव गांगुली की कप्तानी। सहारा से स्पॉन्सरशिप विवाद सुलझने के बाद पुणे वॉरियर्स का आईपीएल-5 में खेलना तय हुआ। पुणे वॉरियर्स की कप्तानी और ‘मेंटरिंग’ का जिम्मा इस बार सौरव गांगुली के पास है। जाहिर-सी बात है कि युवराज सिंह की गैरमौजूदगी में हाथ आए इस मौके पर सौरव गांगुली बहुत कुछ साबित करना चाहेंगे।

दरअसल, संन्यास के बाद भी सौरव को यह लगातार लगता रहा कि उनके अंदर अभी काफी क्रिकेट बचा हुआ है। इस बचे हुए क्रिकेट का इस्तेमाल करने के लिए आईपीएल था। लेकिन पहले सीजन को छोड़ दिया जाए, तो सौरव की स्थिति इस टूर्नामेंट में कभी अच्छी नहीं रही। दूसरे सीजन में उन्हें साझा कप्तानी के लिए तैयार किया गया। तीसरे सीजन में बतौर कप्तान सौरव की वापसी तो हुई, लेकिन तब तक इतने विवाद हो चुके थे कि वह एक बार फिर कुछ ‘खास’ नहीं कर पाए।

पिछली बार पहले तो उनकी बोली ही नहीं लगी और बाद में जब उन्हें पुणे वॉरियर्स ने खरीदा, तो युवी की कप्तानी में खेलना पड़ा। पिछले सीजन में जब उनकी बोली नहीं लगी, तब यह बात निकलकर आई थी कि कोई भी टीम उन्हें इसलिए नहीं लेना चाहती, क्योंकि सौरव अपने साथ टीम में कई विवाद लेकर आते थे। सुनने में यह भी आया कि दादा की बोली न लगने के पीछे कभी उन्हीं की टीम के मालिक रहे शाहरुख खान का हाथ था।

अब युवी की गैर-मौजूदगी में दादा की खुद को साबित करने की ‘भूख’ उनकी टीम की किस्मत बदल सकती है। सच्चाई भी यही है कि अगर दुनिया में दिल और दिमाग, दोनों से कप्तानी करने वालों की सूची बनाई जाए, तो सौरव गांगुली पहले स्थान पर होंगे। मैदान में घुसने से पहले खिलाड़ियों के साथ खड़े होकर ‘टीम हर्डल’ बनाना हो, विदेशी जमीन पर जीत हासिल करने का टीम में आत्मविश्वास पैदा करना हो या लॉर्डस के मैदान में टी-शर्ट उतारकर एंड्र फ्लिंटॉफ का जवाब उन्हीं की धरती पर और उन्हीं के अंदाज में देना हो, ये बातें गांगुली की कप्तानी को ‘खास’ बनाती हैं। वह सौरव गांगुली ही थे, जिन्होंने मैदान पर चाहे कोई भी प्रतिद्वंद्वी हो, उसकी आंखों में आंखें डालकर लोहा लेने का गुण टीम इंडिया को सिखाया।

करीब 12 साल के अंतरराष्ट्रीय सफर में गांगुली ने कई उतार-चढ़ाव देखे। कभी देश, चयकर्ताओं और बोर्ड के चहेते रहे गांगुली ने गुमनामी के अंधेरे भी देखे। पर जब भी यह सूरज अंधेरे से बाहर आया, उसने ऐसी तेज रोशनी दी कि आलोचकों की आंखें चौंधिया गईं। वह हमेशा सुर्खियों में रहे। रन बनें तब भी और नहीं बने तब भी। टीम में रहे या टीम से बाहर हुए, उन्हें सुर्खियां मिलीं। वही गांगुली अब आईपीएल में अपनी कप्तानी से सुर्खियों में जरूर आना चाहेंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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