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जॉब सीकर नहीं जॉब क्रिएटर बनें: सैम

नेशनल इनोवेशन काउंसिल के अध्यक्ष व प्रधानमंत्री के सार्वजनिक सूचना आधारभूत संरचना सलाहकार सैम पित्रोदा ने युवाओं का आहावन करते हुए कहा कि वे जॉब सीकर नहीं जॉब क्रिएटर बनें। खुद के लिए रोजगार नहीं तलाशें बल्कि दूसरे के लिए रोजगार पैदा करें।

माइंडसेट बदलें तभी बिहार को आगे ले जा सकते हैं। युवाओं के अंदर देश को बदलने की क्षमता है।  बदलाव की शुरुआत अपने से ही करनी होगी। छह दशक में देश के अंदर कई बदलाव हुए हैं। लेकिन आज हमारे पास टेक्नोलॉजी की जितनी सुविधाएं हैं उस हिसाब से बदलाव या विकास नहीं हो रहा है। मात्र आठ से दस फीसदी विकास हो रहा है।

पित्रोदा रविवार को चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के तीसरे वार्षिक दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने इस मौके पर संस्थान के 2010-12 बैच के 38 छात्र-छात्रओं को डिप्लोमा व सर्टिफिकेट प्रदान किया। सत्र 2010-12 की टॉपर छात्र गार्गी प्रज्ञा को गोल्डमेडल देकर सम्मानित किया गया। इसी तरह से सर्वश्रेष्ठ एकेडमिक परफॉर्मेस के लिए आयुष कुमार को सम्मानित किया गया। इस सत्र की सेकेंड टॉपर रिचा पांडेय रही।

पित्रोदा ने छात्रों को आगे बढ़ने के कई टिप्स दिए। अपनी भी मिसाल दी। कैसे वे उड़ीसा के एक छोटे से गांव से निकलकर टेल्कम के क्षेत्र में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि आज का देश युवाओं का है। इनके समक्ष कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती तो गरीबी है। आज भी देश में लाखों की आबादी गरीबी रेखा से नीचे है। मृत्युदर कम नहीं हो रही है। कई असमानताएं हैं।

शहरों के बदलाव का ढर्रा बदलने की जरूरत है। शैक्षणिक परिवर्तन की आवश्यकता है। बेहतर शिक्षण व्यवस्था से ही विकास संभव है। आज के दौर में तकनीकी शिक्षा के युवाओं को रिसर्च, नैनो टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, इनोवेटिव वर्क पर ध्यान देना चाहिए। दरअसल भारत दुनिया के लिए बहुत बड़ा मार्केट बन गया है। हालांकि 63.8 फीसदी साक्षरता दर से विकास नहीं होने वाला है।

मुख्य सचिव नवीन कुमार ने कहा कि स्थापना के चार वर्षो में संस्थान ने काफी तरक्की की है। यहां के छात्रों का बेहतर जगह प्लेसमेंट हो रहा है। छात्रों को ई लाइब्रेरी की सुविधा मिल रही है। सीआईएमपी सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रहा है। पिछड़े वर्ग के छात्रों के दाखिले के लिए संस्थान में विशेष प्रावधान है।

संस्थान के निदेशक वी मुकुंद दास ने कहा कि संस्थान की बेहतरी के लिए मुख्यमंत्री से सलाह ली जाती है। संस्थान ने कम वर्षो में ही कई उपलब्धियां हासिल की है। आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की तरह छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है।

छात्रों का प्लेसमेंट दर शतप्रतिशत है। यहां से पासआउट आरक्षित श्रेणी के बच्चे भी सामान्य श्रेणी के छात्रों की तरह मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी हासिल कर रहे हैं। सरकारी पदाधिकारियों के लिए स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम भी होता है। प्रत्येक वर्ष 240 छात्रों का दाखिला लिया जाता है। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डा. नवनीत कौर ने किया।

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