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बनेगा मस्तिष्क का कंप्यूटर मॉडल

नए शोधों के अनुसार मस्तिष्क का विस्तृत कंप्यूटर मॉडल बनाने के कार्य में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, अभी इस कार्य में पूरी तरह से सफलता मिलने में लंबा समय है, लेकिन मौजूदा जानकारी के आधार पर भी मस्तिष्क से जुड़ी कई गुत्थियां सुलझोंगी और अनेक आनुवांशिक रोगों का भी निदान संभव होगा। बता रहे हैं मुकुल व्यास

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे मस्तिष्क की स्नायु कोशिकाओं के कनेक्शनों और कार्यों को समझना संभव हो गया है। स्नायु-विज्ञान में रिसर्च का एक नया क्षेत्र उभर रहा है, जिसे ‘कनेक्टोमिक्स’ कहते हैं। जैसे जीनोमिक्स के जरिये आनुवांशिक बनावट की पड़ताल होती है, उसी तरह कनेक्टोमिक्स के जरिये मस्तिष्क की स्नायु कोशिकाओं के कनेक्शनों अथवा सिनॉप्सिस का नक्शा तैयार किया जाता है।

इन कनेक्शनों की मैपिंग द्वारा यह जानने की कोशिश की जाती है कि मस्तिष्क के सर्किट में सूचनाओं का प्रवाह किस तरह से होता है। स्नायु कोशिकाओं का नक्शा वैज्ञानिकों को यह बता सकेगा कि मस्तिष्क के भीतर अनुभूतियां, हलचल और विचार किस तरह उत्पन्न होते हैं तथा एल्जाइमर, स्किट्सफ्रीनिया और पक्षाघात (स्ट्रोक) जैसी बीमारियों में स्नायु-कोशिकाओं के कार्यो में कैसी गड़बड़ी पैदा हो जाती है।

दिमाग की गुत्थी
मस्तिष्क के कनेक्शनों की नापजोख करना आसान काम नहीं है। उसमें करीब 100 अरब स्नायु कोशिकाएं होती हैं। इन्हें हम न्यूरोन भी कहते हैं। प्रत्येक न्यूरोन हजारों अन्य स्नायु कोशिकाओं के साथ जुड़ा होता है। ये कनेक्शन ‘सिनॉप्सिस’ कहलाते हैं। इनकी संख्या खरबों में होती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिक टॉम मृसिक-फ्लोगेल के नेतृत्व में रिसर्चरों की टीम इन कनेक्शनों की जटिलताओं को सुलझाने की कोशिश कर रही है।

स्नायु सर्किट कैसे काम करता है, यह जानने के लिए सबसे पहले हमें पता होना चाहिए कि प्रत्येक न्यूरोन का विशिष्ट कार्य क्या है और वह मस्तिष्क की किन कोशिकाओं के साथ जुड़ा है। यदि हम कुछ खास फंक्शन वाले न्यूरोन के बीच कनेक्शनों का नक्शा तैयार करने का कोई तरीका खोज लें तो हम एक दिन इसके आधार पर मस्तिष्क का कंप्यूटर मॉडल तैयार कर सकेंगे। फिर यह समझना संभव हो जाएगा कि मस्तिष्क का जटिल स्नायु नेटवर्क किस तरह विचारों और अनुभूतियों को जन्म देता है।

डॉ. मृसिक-फ्लोगेल की टीम ने चूहे के मस्तिष्क के विजुअल कोर्टेक्स पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। यह हिस्सा आंखों से मिलने वाली सूचनाओं की प्रोसेसिंग करता है। चूहे के मस्तिष्क में हजारों न्यूरॉन और विभिन्न किस्म के लाखों कनेक्शन होते हैं। रिसर्चरों ने हाई रेजोल्युशन इमेजिंग द्वारा यह  पता लगा लिया कि कौन-सा न्यूरोन किस सूचना पर कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। इस तकनीक को कई बार दोहराने के बाद रिसर्चर विजुअल कोर्टेक्स में सैकड़ों स्नायु कोशिकाओं के कार्यों और उनकी कनेक्टिविटी को समझने में कामयाब हो गए।

अध्ययन से इस बहस का भी समाधान हुआ कि क्या स्नायु कोशिकाओं के बीच के कनेक्शन बेतरतीब हैं अथवा वे न्यूरोन के विशिष्ट गुणों के साथ जुड़े हैं? रिसर्चरों ने सिद्ध किया कि जिन स्नायु कोशिकाओं ने एक खास प्रकाशीय सूचना पर एक जैसी प्रतिक्रिया दिखलाई, उनमें भिन्न गुणों वाली कोशिकाओं के मुकाबले एक साथ जुड़ने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है।

रिसर्चरों को उम्मीद है कि इस तकनीक के जरिये विजुअल कोर्टेक्स जैसे मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों में स्नायु-कोशिकाओं की वायरिंग का चित्र बनाना संभव हो जाएगा। मस्तिष्क के बेहद जटिल सर्किटों में विद्यमान न्यूरोन द्वारा किए जाने वाले कार्यो को समझने के लिए यह ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। इस तकनीक से मस्तिष्क के उन हिस्सों की सर्किट वायरिंग का भी पता लगाया जा सकता है, जो स्पर्श, श्रवण और हलचल के लिए जिम्मेदार हैं।

मस्तिष्क का एटलस
अमेरिका के एलेन इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेन साइंस ने मानव मस्तिष्क का पहला विस्तृत जीन मैप तैयार किया है। दो मानव मस्तिष्कों के जीन नक्शों में 94 प्रतिशत समानता दिखी। इससे यह पता लग सकता है कि मस्तिष्क में जीन्स की अभिव्यक्ति कैसे होती है। जीन नक्शे तैयार करने के पीछे उद्देश्य मानव मस्तिष्क का एटलस बनाना है। दो मस्तिष्कों के जीन-नक्शे तुलनात्मक अध्ययन के लिए तैयार किए हैं। इससे पता चलता है कि किसी मस्तिष्क में जीन खुद को कैसे अभिव्यक्त करते हैं और यह भी कि मानव मस्तिष्क आनुवांशिक तौर पर कहां समान है और जीन-नक्शे में दिखने वाले अंतर मस्तिष्क में कैसे भिन्न-भिन्न तरीके से अभिव्यक्त होते हैं।

नई शुरुआत
डॉ. मृसिक-फ्लोगेल का कहना है कि मस्तिष्क की गुत्थियों को सुलझाने की शुरुआत हो चुकी है। एक बार मस्तिष्क की विभिन्न परतों में स्नायु-कोशिकाओं के कार्यो और उनकी कनेक्टिविटी की पूरी तस्वीर सामने आने के बाद हम मस्तिष्क का कंप्यूटर मॉडल बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यह मॉडल हमारे दिमाग की कार्य प्रणाली को दोहरा कर बतलाएगा, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैज्ञानिकों को कई वर्ष तक अथक प्रयास करने होंगे।

इसके अलावा, इस कार्य के लिए अत्यधिक प्रोसेसिंग पावर वाले कंप्यूटर भी चाहिए। मस्तिष्क हमारे शरीर का बहुत जटिल अंग है। इसकी आंतरिक कार्य प्रणाली को समझना विज्ञान का एक प्रमुख लक्ष्य है। ताजा रिसर्च ने स्नायु-वैज्ञानिकों को इस दिशा में और आगे बढ़ने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है।

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