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पंजाब व कश्मीर पर नक्सलियों की नजर

ओडिशा में इतालवी पर्यटक और बीजद विधायक के अपहरण की वारदात करने वाले माओवादी अब पूर्वोत्तर, कश्मीर और पंजाब सहित देश के कुछ अन्य इलाकों में अपनी गतिविधियां फैलाना चाहते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बिहार, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश के अलावा माओवादी अब तेजी से पूर्वोत्तर के राज्यों असम, त्रिपुरा, मणिपुर तथा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और यहां तक कि दिल्ली में भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

गृह मंत्रालय का कहना है कि माओवादी महाराष्ट्र के कुछ और जिलों में अपना आधार मजबूत करना चाहते हैं। गढचिरौली, गोंदिया और चंद्रपुर में उनकी गतिविधियां पहले से हैं। मंत्रालय के एक अधिकारी ने दावा किया कि माओवादियों ने नागपुर, वर्धा, मुंबई, नासिक और पुणे में भी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना बनायी है।

अधिकारी ने बताया कि पूर्वोत्तर में माओवादियों के मणिपुर के उग्रवादी संगठनों के साथ अच्छे संबंध हैं जबकि वे असम और ब्रहमपुत्र घाटी में सक्रिय उग्रवादी संगठनों और उनके नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

इस बीच, सूत्रों ने बताया कि जबरदस्त कोशिशों के बावजूद छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य में सुरक्षाबल माओवादियों के नेटवर्क में कोई खास सेंध नहीं लगा पाये हैं। दंडकारण्य को माओवादियों की मजबूत पकड़ वाला इलाका माना जाता है।

सूत्रों ने दावा किया कि माओवादियों ने अलग-अलग राज्यों से 15000 से अधिक लडाका कैडरों को जोड़ा है। माओवादियों द्वारा प्रायोजित वेबसाइटों को प्रतिबंधित करने के सरकारी प्रयासों के बावजूद इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट हैं जो भाकपा-माओवादी के प्रकाशनों और दस्तावेजों का कथित दमन करने के सरकार के प्रयासों का कड़ा विरोध करती हैं।

उन्होंने बताया कि ऐसी ही एक वेबसाइट में कहा गया है कि उसका भाकपा-माओवादी या किसी अन्य पार्टी से कोई लेनादेना नहीं है, लेकिन साथ ही कहती है कि वह भाकपा-माओवादी और अन्य पार्टियों के प्रकाशनों और विचारों को पढ़ने के लिए भारत और दुनिया के लोगों के अधिकारों का समर्थन करती है।

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  • Web Title:पंजाब व कश्मीर पर नक्सलियों की नजर