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सत्ता पक्ष वेल में आया, विपक्ष का वॉकआउट

रांची हिन्दुस्तान ब्यूरो। सीएनटी और नोट फॉर वोट पर बहस कराने की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस भी हुई। वेल में आए विधायक सीएनटी विरोधी हाय-हाय, सीएनटी को सख्ती से पालन करो की नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच विपक्ष की ओर से भी सीएनटी के उल्लंघन करनेवाले नेता, अधिकारी को जेल भेजो की नारेबाजी होने लगी।

अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया। वेल में रामदास सोरेन, शशांक शेखर भोक्ता, लोबिन हेंब्रम, जगन्नाथ महतो आए थे। अध्यक्ष के कहने पर विधायक अपनी सीट पर पहुंचे। इसके बाद अध्यक्ष ने एक-एक कर विधायकों से राय जाननी चाहिए।

बजट सत्र में पूछे गए 1489 सवाल : बजट सत्र के दौरान विधायकों ने 1489 सवाल पूछे। इसमें 155 सवालों का जवाब सरकार की ओर से सदन में दिया गया। शेष सवालों का जवाब विभाग की ओर से विधायकों को उपलब्ध कराया गया। अध्यक्ष सीपी सिंह ने बताया कि इसमें अल्पसूचित 222, तारांकित 1023 और अतारांकित 244 सवाल पूछे गए।

कार्यवाही बाधित होने से विस अध्यक्ष आहत : विगत दो दिन से सदन की कार्यवाही बाधित होने की घटना से विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह आहत हैं। कहा कि दोनों पक्ष के सहयोग से 14 दिन तक सदन सुचारू रूप से चला। अंतिम दो दिन सदन चलने में सहयोग नहीं किया गया। पहले से जो कार्यसूची में नहीं है, उस पर चर्चा-बहस नहीं कराई जा सकती है। कुछ विधायकों के कारण ही लगातार सदन बाधित होता है। इन विधायकों को शेष विधायकों का अधिकार हड़पने का कोई अधिकार नहीं है। यह गलत है।

पंचायत के फैसले पर उठा सवाल : दुमका के रामगढ़ पंचायत में पीट-पीटकर दो युवकों के मारे जाने की घटना पर विधानसभा में शनिवार को सवाल उठा। विधायक रघुवर दास ने कहा कि राज्य में इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन किसी ने चर्चा तक नहीं की। अध्यक्ष महोदय इस पर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। इस पर अध्यक्ष सीपी सिंह ने कहा कि सरकार मामले को संज्ञान में ले। इस पर त्वरित और नियमसम्मत कार्रवाई करें।

सीएनटी के बारे में सदन में चर्चा अधूरी है। सभी सदस्यों की राय आनी चाहिए। विपक्ष के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी है। अध्यक्ष महोदय गरीबों की जमीन लूटी जा रही है। यह महत्वपूर्ण विषय है। जानबूझकर विपक्ष इस पर बहस से भाग रहा है।

-लोबिन हेंब्रम आदिवासियों को भी अब तीर नहीं, कलम की जरूरत है। सीएनटी पर बहस तो पूरी होनी ही चाहिए। इस एक्ट का सरकार कड़ाई से पालन करे।

-रघुवर दासराज्यसभा चुनाव में पैसे के लेन-देन की बात उजागर हो चुकी है। इसकी जांच सीबीआइ से कराई जाए। आयोग का गठन भी होना चाहिए। साईंनाथ यूनिवर्सिटी का विधेयक घंटों में लाकर मिनटों में पारित करा दिया गया। यह नियम विरुद्ध है।

- विनोद सिंहसीएनटी एक्ट पर सदन में चर्चा होनी चाहिए थी। सरकार ने भी सदन में चर्चा की बात कही। चर्चा पूरी नहीं होने से वह आहत हैं। आज भी सरकार चाहती तो विशेष सत्र बुलाकर बहस करा सकती थी, लेकिन सरकार जवाब देने से भाग रही है। चर्चा नहीं होना अन्याय है।

-बंधु तिर्की करोड़ों रुपये पकड़ाया है। इससे राज्य की छवि को धक्का पहुंचा है। इस पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराकर दोषियों को सजा दी जाए। इसके अलावा सीएनटी पर भी बहस के लिए दो दिन का विशेष सत्र हो।

- केएन त्रिपाठीराज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की ओर पूरे देश की अंगुली उठी है। माननीयों पर भी सवाल खड़ा हो गया है। इसकी सीबीआइ या फिर किसी निजी एजेंसी जांच करानी चाहिए।

-निर्भय शाहाबादीसरकार की मंशा साफ नहीं होगी, तो फिर बहस से क्या फायदा। सीएनटी कानून है ही। इसका उल्लंघन करनेवाले पर सरकार त्वरित कार्रवाई करे।

-अन्नपूर्णा देवीसदन की घोषणाओं को अमल में लाए सरकार : स्पीकर

रांची हिन्दुस्तान ब्यूरो। बजट सत्र के समापन भाषण में स्पीकर सीपी सिंह ने कहा कि सदन की घोषणाओं को सरकार द्वारा अमल में लाने की पूरी उम्मीद है। अब वह समय आ गया, जब बहुमत से फैसले लेने की जगह सर्वानुमति बने। समस्त फैसले पारदर्शी हो।

अवसर और संसाधन के समान वितरण के अभाव में राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की बेढ़ंगी तसवीर उभरी है। इस कारण से ही आज गुंडगांव, दिल्ली मुंबई और बेंगलुरू की प्रति व्यक्ति आय और दुमका के लोगों की दैनिक आय के बीच जमीन-आसमान का अंतर है।

यह कोशिश करनी होगी कि सरायकेला-साहेबगंज के बीच का फर्क मिटे। दुमका और रांची की दूरियां घटे। विस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकताएं तय करनी होगी। पारदर्शिता के साथ प्राथमिकताओं का कारण भी स्पष्ट करना चाहिए।

कारण समय-समय पर सरकार पर यह आरोप लगते रहे हैं कि क्षेत्र विशेष पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। आगामी वित्तीय वर्ष में जब सरकार नया बजट लेकर आए, तो अनुदान मांगों पर चर्चा के दिन योजनावार-क्षेत्रवार राशि आवंटन का प्रतिवेदन भी पटल पर रखें।

विशेष कमेटी बनी : विस अध्यक्ष ने कहा कि विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही को लेकर संसदीय कार्य मंत्री हेमलाल मुर्मू की अध्यक्षता में विशेष कमेटी बनाई गई है। इसमें राजेंद्र सिंह, प्रदीप यादव, अन्नपूर्णा देवी, रघुवर दास, उमाकांत रजक, विनोद कुमार सिंह, अरूप चटर्जी, विदेश सिंह, बंधु तिर्की और सुधा चौधरी को रखा गया है।

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