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कृपया पर्दा हटाकर अंदर मत झांकिए

तीन-चौथाई मार्च बीतने पर ही मौलाना तहमद-बनियाईन पर उतर आए थे। साथ ही छोटी-सी पंखिया भी झल रहे थे। बोले, ‘भाई मियां, इस बार तो सर्दियों ने आदमी को ऐंठकर अदरक बना डाला। अब लगता है कि गर्मियां गन्ने के रस की तरह पसीना निचोड़ लेंगी। सरकार बदली, सीजन बदला.. आम आदमी दोनों को झेले.. सरकार भी, सीजन भी। कोई और रास्ता है भी कहां। बिजली वाले अभी से आंखमिचोली करके चिकनी चमेली जैसे नखरे मार रहे हैं। पंखे बहिनजी के हाथियों की तरह खामोश हैं। हाथी और हाथी वालों के नगाड़े थम गए हैं।’
छींटदार रूमाल से लहराती दाढ़ी पोंछकर बोले, ‘अलबत्ता न्यूजों वाले हमेशा की तरह अब भी गुलगफ्फे छोड़ने में मसरूफ हैं। छपा है कि नेताओं की जिंदगी में ताक-झांक पर इनाम। अमेरिका में एक कोई लेरी फ्लिंट हैं। उन्होंने विज्ञापन दिया है कि जो शख्स वहां के नेताओं और सरकारी अफसरों की अंदरूनी रंगीन जिंदगी की सबूत समेत जानकारी देगा, उसे दस लाख डॉलर बतौर इनाम मिलेगा। भई खुदा के वास्ते वहीं तक रहिएगा। हमारे इंडिया में दखल मत दीजिएगा। यहां कोई इनाम का लालच में जूतियां घिस डाले, सिर मुंडा डाले, तब भी नेताओं और अफसरों की अंदरूनी रंगीन जिंदगी पर पर नहीं मार सकता.., सीबीआई को छोड़कर। जब सीबीआई के हवाले से खबर छपती है, तब लोग दांतों तले अंगुली दबाते हैं कि हाय, ये भी अय्याश निकले। वरना अपने यहां तो सब राइट टाइम है। मुंह में तुलसी.. पेट में अल्कोहल यानी दारू.., जिंदाबाद भय्ये।’ मुंह में चुटकी भर पान मसाला झोंककर बोले, उनके नेता अफसर रंगीन मिजाज होंगे, तभी तो दस लाख डॉलर इनाम। अपन के यहां सब जनसेवक व गरीब-परवर हैं। एकाध रेप या अपहरण तो अपने यहां खैर लगा ही रहता है। नेता, अफसर होकर भी चरित्र की स्लेट क्लीन रखें.. यह तो जनाब उनकी कुरसी की तौहीन है। बड़प्पन की झंडी कुछ तो बुलंद रहनी ही चाहिए, वरना हुजूर हाकिम और हमीदे हज्जाम में फर्क क्या रहा? कैरी ऑन, साहबजी। ..चलो भाई मियां, एक-एक गिलास भर नींबू की शिकंजी छकते हैं। जरा तरावट बनी रहे। दैट्स ऑल, माई डियर।

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