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क्यों अलग है हिन्दुस्तान

मैं एक हफ्ते के लिए विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में हूं और दो अनुभव आपसे बांटना चाहता हूं। मैं वाघा सीमा पार कर लाहौर से अमतृसर पहुंचा। वहां से टैक्सी लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुआ। जब हम जालंधर पहुंचे, तो टोल प्लाजा की जिस लाइन में खड़े थे, वहां ट्रैफिक जाम लगा था। नीली बत्ती वाली कार में बैठा एक शख्स टोल प्लाजा के काउंटर पर मौजूद लड़के से बहस कर रहा था। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जब हम काउंटर पर पहुंचे, तो मैंने लड़के से पूछा, ‘ भाई साहब क्या हुआ?’ उसने बताया, ‘वह टोल टैक्स नहीं दे रहा था और कह रहा था कि सेना में है। मैंने कहा, आप चाहें कहीं भी हों, टैक्स तो देना पड़ेगा।’ लड़के के मुताबिक, उसने 50 रुपये का टैक्स लिया। मेरे लिए यह बड़ी बात थी, क्योंकि मैं उस देश का नागरिक हूं, जहां सेना ही सब कुछ है। इस्लामाबाद से कराची तक करीब 1200 किमी की यात्रा करने वाले को कई बार टोल टैक्स देना पड़ता है, पर सेना के अधिकारी या जवान से टैक्स नहीं लिया जाता। पाकिस्तान में जो टैक्स देता है, उसको सुविधा नहीं मिलती, बल्कि जो टैक्स नहीं देता है, उसको तमाम सुविधाएं मिलती हैं। दूसरी बात जिसने हैरान किया, वह है कि भारत में टैक्सी चलाने के लिए परमिट होता और निजी गाड़ियों की तुलना में अधिक टैक्स देना पड़ता है। पाकिस्तान में ऐसा संविधान में है, पर इस पर अमल नहीं होता है। भारत में ये देखकर अचरज इसलिए होता है कि यह देश हमारे देश जैसा है। यहां के लोग हमारे जैसे हैं, पर कुछ मामलों में भारत, पाकिस्तान से अलग क्यों है?
बीबीसी ब्लॉग में हफ़ीज़ चाचड़

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