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राज्य में विश्वविद्यालयी शिक्षा की स्थिति असंतोषपूर्ण

बिहार सरकार ने संसाधन की कमी की दुहाई देते हुए मंगलवार को स्वीकार किया कि उच्च शिक्षा के केंद्र माने जाने वाले विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे, शिक्षक, गैर शिक्षकों की संख्या, शैक्षिक वातावरण और छात्रावास सुविधा आदि संतोषजनक नहीं है।

राज्य के शिक्षा मंत्री प्रशांत कुमार शाही ने विधानसभा में एक तारांकित प्रश्न के जवाब में स्वीकार किया कि राज्य के विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचे की स्थिति, शिक्षक और गैर शिक्षकों की संख्या, शैक्षिक वातावरण और छात्रवास सुविधा की हालत संतोषप्रद नहीं है।
विश्वविद्यालयों को उन्नत बनाने में लंबी दूरी तय करनी होगी और अधिक संसाधनों की दरकार है।

भाजपा सदस्य अच्युतानंद के प्रश्न के जवाब में शाही ने कहा कि विश्वविद्यालयों ने 2011-12 के दौरान 44 अरब 63 करोड़ रुपये की मांग की थी जिसके विरूद्ध राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों के लिए 30 अरब 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।

इसमें से 19 अरब 59 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। तकनीकी परीक्षा आदि आयोजन कराने के लिए आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय को आठ अरब 59 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्चतर शिक्षा में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को 2011-12 की अवधि में 28 अरब 18 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये गये हैं। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से भी 201 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया है।

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