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कंपनियों के फाइनेंस मिनिस्टर

तेजी से विकास करती भारतीय अर्थव्यवस्था में फाइनेंस और अकाउंट्स से जुड़े करियर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंसी भी उन्हीं में से एक है। इसके बारे में विशेष जानकारी दे रहे हैं संजीव कुमार सिंह

पिछले कुछ वर्षों से मल्टीनेशनल कंपनियों के देश में आने से फाइनेंस और अकाउंट्स के क्षेत्र में रौनक बढ़ी है। स्थानीय कंपनियां भी रोजगार के एक बड़े हब के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। आजकल कंपनियों में कॉस्ट कटिंग का चलन बढ़ गया है। इसका फायदा सीधे तौर पर कंपनी को मिलता है। कॉस्ट कटिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट (सीएमए) कहलाते हैं। ये किसी भी कंपनी की बिजनेस पॉलिसी तैयार करने, स्ट्रेटिजिक डिसिजन उपलब्ध कराने, फाइनेंशियल रिपोर्ट प्रस्तुत करने संबंधी कार्य करते हैं।

मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स की ओर से जारी अधिसूचना के तहत अब बल्क ड्रग, टेलीकम्युनिकेशन, शुगर, इलेक्ट्रिसिटी, पेट्रोलियम सहित करीब एक दर्जन निर्माता इकाइयों में कॉस्ट ऑडिट अनिवार्य होगा। इससे उत्पाद निर्माण में गुणवत्ता तथा उत्पाद लागत में कमी आने का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को मिलेगा। अब ऐसी निर्माता कंपनियों को कॉस्ट ऑडिट के दायरे में लाया गया है, जिनकी नेट वर्थ पांच करोड़ से ऊपर तथा टर्नओवर 20 करोड़ से अधिक होगा या उन कंपनियों की इक्विटी भारत में या भारत के बाहर किसी भी शेयर बाजार में लिस्टेड है या लिस्टिंग की प्रक्रिया में है।

बदले स्वरूप में आईसीडब्ल्यूए
भारत सरकार की संसद के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूए) का नाम भारत सरकार के गजट के अंतर्गत दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) कर दिया गया है। इसके अलावा सभी मेंबर आईसीडब्ल्यूए से अब कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट यानी सीएमए बन गए हैं।

क्या काम है सीएमए का
सीएमए किसी भी कंपनी के लाभ को बढ़ाते हैं तथा खर्च में कटौती का पूरा खाका भी खींचते हैं। इसके अलावा ये कंपनी के मैनेजर के साथ बैठ कर किसी विशेष प्रोजेक्ट के लिए बजट भी तैयार करते हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट जहां कंपनी की रिपोर्ट डायरेक्टर या मैनेजर के पास भेजता है, वहीं एक सीएमए उस रिपोर्ट को कंपनी के डायरेक्टर या मैनेजर के पास न भेज कर सीधे भारत सरकार को भेजता है। जानकारों की मानें तो आने वाले समय में हर बड़ी कंपनी में सीएमए की नियुक्ति अनिवार्य हो जाएगी।

सीए/सीएस/सीएमए में अंतर
अक्सर छात्र सीए, सीएस और सीएमए को एक ही मान बैठते हैं, लेकिन सब के कार्य के स्वरूप और भूमिकाएं अलग-अलग हैं। इसमें सीए और सीएमए एक जैसे होते हैं, लेकिन सीएस का काम इनसे अलग होता है। सीएस का काम कंपनी लॉ से संबंधित है, जबकि सीए वार्षिक रिपोर्ट की ऑडिटिंग संबंधित काम देखते हैं। इसी तरह से सीएमए इंटर्नल ऑडिटिंग, कॉस्ट ऑडिटिंग से जुड़े कार्यों में अपनी सेवाएं देते हैं। इस तरह से तीनों का अपना अलग-अलग महत्व है।

कोर्स से मिल रही सहायता
सीएमए बनने के लिए रेगुलर तथा पत्राचार कोर्स मौजूद हैं, लेकिन पत्राचार वाले छात्रों को अपना एग्जाम रेगुलर छात्रों के साथ ही देना होता है। इसके लिए दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। ये कोर्स तीन चरणों फाउंडेशन, इंटरमीडिएट एवं फाइनल कोर्स के रूप में होते हैं। इसमें दाखिले के लिए उम्र-सीमा का भी प्रावधान है। कॉस्ट कटिंग, वर्क अकाउंटिंग तथा अकाउंटिंग मैनेजमेंट जैसे विषयों की पढ़ाई पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इसका फायदा भी छात्रों को खूब मिल रहा है।

दाखिले का स्वरूप और फीस
साल भर में दो बार परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। फाउंडेशन और इंटरमीडिएट कोर्स के लिए जून (11-18 जून) में होने वाले एग्जाम में दाखिले की अंतिम तिथि 5 दिसंबर और दिसंबर (10-17 दिसंबर) में होने वाली परीक्षाओं के लिए दाखिले की अंतिम तिथि 5 जून तय की गई है। तीनों कोर्स के दौरान तीन साल की ट्रेनिंग अनिवार्य है। इंटरमीडिएट कोर्स के बाद छह माह की ट्रेनिंग होती है, इसके बाद ही फाइनल कोर्स में प्रवेश मिलता है। फाउंडेशन कोर्स के लिए फीस 3500, इंटरमीडिएट कोर्स के लिए पोस्टल 15,700 और ओरल 19,700 रुपए, जबकि फाइनल कोर्स में पोस्टल फीस 11,500 और ओरल के लिए 16,500 रुपए निर्धारित है। यह फीस हर साल रिवाइज भी होती है।

कोर्स स्ट्रक्चर

फाउंडेशन कोर्स
ऑर्गनाइजेशन एंड मैनेजमेंट फंडामेंटल्स
अकाउंटिंग
इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस फंडामेंटल्स
बिजनेस मैथमेटिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स फंडामेंटल्स

इंटरमीडिएट कोर्स
फाइनेंशियल अकाउंटिंग
कॉमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल लॉज़ एंड ऑडिटिंग
अप्लायड डायरेक्ट टैक्सेशन
कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग
ऑपरेशन मैनेजमेंट एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम
अप्लायड इनडायरेक्ट टैक्सेशन

फाइनल कोर्स
कैपिटल मार्केट एनालिसिस एंड कॉरपोरेट लॉज़
फाइनेंशियल मैनेजमेंट एंड इंटरनेशनल फाइनेंस
मैनेजमेंट अकाउंटिंग स्ट्रेटिजिक मैनेजमेंट
इनडायरेक्ट एंड डायरेक्ट टैक्स मैनेजमेंट
मैनेजमेंट अकाउंटिंग-एंटरप्राइज परफॉर्मेन्स मैनेजमेंट
एडवांस फाइनेंशियल अकाउंटिंग एंड रिपोर्टिंग
कॉस्ट ऑडिट एंड ऑपरेशनल ऑडिट
बिजनेस वैल्यूएशन मैनेजमेंट

फैक्ट फाइल
प्रमुख संस्थान

दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई)
वेबसाइट
- www.icwai.org
(हेड ऑफिस कोलकाता में स्थित है। इसके चार रीजनल काउंसिल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा चेन्नई में हैं। इसके कुल 95 चैप्टर हैं।)

योग्यता
फाउंडेशन कोर्स में प्रवेश के लिए छात्र को बारहवीं की परीक्षा पास करनी जरूरी है। साथ ही उनकी उम्र 17 साल से कम नहीं होनी चाहिए। इंटरमीडिएट कोर्स के लिए 12वीं के साथ-साथ फाउंडेशन कोर्स अथवा किसी डिग्री कॉलेज अथवा विवि से बैचलर होना जरूरी है। रिजल्ट की इंतजार कर रहे छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उनकी उम्र 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। फाइनल कोर्स के लिए फाउंडेशन/इंटरमीडिएट कोर्स उत्तीर्ण होना जरूरी है।

स्किल्स
सीएमए खास कर उन्हीं लोगों के लिए है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कठिन मेहनत की क्षमता रखते हों। इस प्रोग्राम को पूरा करने में ही छात्रों को अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है। कॉमनसेंस, प्रशासनिक कौशल, लीगल एप्टीटय़ूड, गणितीय कौशल, निर्णय लेने की क्षमता, करेंट अफेयर्स से अपडेट होना जरूरी है।

वेतनमान
बतौर सीएमए घरेलू कंपनियों में प्रोफेशनल्स को जूनियर लेवल पर 15,000-20,000 रुपए प्रतिमाह तथा सीनियर लेवल पर 30,000-35,000 रुपए प्रतिमाह मिलता है। कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए 6-10 लाख रुपए प्रतिवर्ष का पैकेज मिलता है। विदेशी कंपनियां इन्हें अच्छे पैकेज पर रख रही हैं। यदि आप विदेश जाकर या अपनी प्रैक्टिस कर रहे हैं तो फिर आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती।

पॉजिटिव/निगेटिव
ग्रोथ की व्यापक संभावनाएं
आकर्षक सेलरी व प्रतिष्ठा
निजी प्रैक्टिस की संभावना
अधिक परिश्रम
जिम्मेदारी एवं चुनौतीपूर्ण कार्य

संभावनाएं
कोर्स पूरा करने के बाद देश अथवा विदेश की सरकारी/गैर सरकारी कंपनियों में कॉस्ट अकाउंटिंग, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, फाइनेंशियल-बिजनेस एनालिस्ट, ऑडिटिंग/ इंटरनल ऑडिटिंग, स्पेशल ऑडिट्स, डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट टैक्सेज, सिस्टम एनालिसिस एंड सिस्टम मैनेजमेंट के रूप में काम कर सकते हैं। मैन्युफैक्चरिंग कंपनी या सर्विस सेक्टर में भी काम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त स्वतंत्र रूप से भी प्रैक्टिस की जा सकती है।

सक्सेस स्टोरी
फील्ड वर्क के लिए प्रैक्टिकल जानकारी जरूरी

सीएमए विकास श्रीवास्तव
डिप्टी मैनेजर, रिलायंस कम्युनिकेशन, यूपी/उत्तराखंड हब

सीएमए बनने की राह तो मेरे पिताजी ने दिखाई थी। 1974 के दौरान इसका आईसीडब्ल्यूए नाम था। लखनऊ से मैथ्स में ग्रेजुएशन करने के बाद मैंने इसके इंटरमीडिएट कोर्स में प्रवेश लिया। उस समय कोर्स के दौरान ज्यादा ट्रेनिंग नहीं होती थी, लेकिन आज ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी गई है। 2006 में कोर्स कंपलीट करने के बाद मैंने दो साल तक एक हाउसिंग कंपनी में काम किया। जैसे-जैसे अच्छा अवसर मिलता गया, मैं उसको भुनाता गया। मुझे प्राइवेट प्रैक्टिस की बजाय जॉब करना ठीक लगा। काम के दौरान मैंने देखा कि जॉब में डिग्री से काफी सहायता मिलती है, जबकि फील्ड वर्क में प्रैक्टिकल नॉलेज का होना बहुत जरूरी है।

इस क्षेत्र में नए आने वाले छात्रों से मैं यही कहूंगा कि वे कठिन परिश्रम को अपने जीवन का आधार बना लें, क्योंकि इसमें सफलता पाने का कोई शॉर्टकट नहीं है। यदि आपके अंदर काबिलियत है, तभी कोई कंपनी आपको काम देगी। जो भी पढ़ें, उसे अच्छे से आत्मसात कर लें, क्योंकि काम के दौरान पढ़ाई ही संबल प्रदान करती है।

एक्सपर्ट व्यू
प्रशिक्षित लोगों की काफी मांग है देश में

सीएमए राकेश सिंह
वाइस प्रेसिडेंट, आईसीएआई

सीएमए के लिए भारतीय बाजारों में क्या संभावनाएं हैं?
भारत में जिस तरह से ग्रोथ हो रही है, उसे देख कर कहा जा सकता है कि यहां पर संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं। भारतीय कंपनियां अपना प्रोडक्ट विदेशों में भेज रही हैं तथा विदेशी कंपनियां भी यहां आ रही हैं। साथ ही यहां के प्रोफेशनल्स भी विदेशों में जाकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं तथा अपने प्रोडक्ट को लॉन्च करा रहे हैं।

छात्रों के लिए जॉब बढ़िया विकल्प है या प्रैक्टिस?
मेरी नजर में दोनों ही अपनी जगह पर ठीक हैं। जॉब में जहां प्रोफेशनल्स एक ही जगह पर नियत समय के दौरान काम करते हैं, वहीं प्रैक्टिस में उन्हें नई-नई चुनौतियों और नए-नए विषयों की जानकारी होती है। छात्र अनुभव के बाद ही प्रैक्टिस में आएं।

डिस्टेंस लर्निंग के जरिए कोर्स करने वाले छात्रों को क्या दिक्कतें आती हैं?
जानकारी के लिहाज से दोनों ही ठीक हैं। आईसीडब्ल्यूए (अब आईसीएआई) में पोस्टल छात्रों को टेस्ट पेपर भेज दिया जाता है और वे उसे हल कर भेजते हैं। जो इसमें पास होता है, उसी को एग्जाम में बैठने की अनुमति दी जाती है।

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