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वार्ताकार का मध्यस्थता से इंकार, बंधक संकट गहराया

ओडिशा में नक्सलियों द्वारा इटली के दो पर्यटकों को अगवा किए जाने के छह दिन बाद मंगलवार को बंधक संकट उस समय गहरा गया, जब प्रस्तावित तीन वार्ताकारों में से एक ने कहा कि वह नक्सलियों की ओर से मध्यस्थता नहीं करना चाहते।

नक्सलियों द्वारा नियुक्त वार्ताकारों में शामिल, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बिश्वप्रिय कानूनगो ने संवाददाताओं से कहा कि वह मध्यस्थता के प्रस्ताव पर तभी विचार करेंगे, जब नक्सली और सरकार, दोनों उन्हें इस भूमिका में देखना चाहेंगे।

ज्ञात हो कि खुद को सुनील बताने वाले एक नक्सली नेता ने सोमवार देर शाम कुछ चुनिंदा पत्रकारों को भेजे एक आडियो संदेश में मध्यस्थता के लिए तीन नामों की घोषणा की थी। इन मध्यस्थों में झारखण्ड की गिरिडीह जेल में कैद वरिष्ठ नक्सली नेता नारायण सान्याल, सामाजिक कार्यकर्ता दंडपाणि मोहंती और कानूनगो के नाम शामिल हैं। मोहंती और कानूनगो ओडिशा के रहने वाले हैं।

नक्सलियों ने एकतरफा संघर्ष विराम की भी घोषणा की है और राज्य की सीमा पर सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हिंसा बंद करने की अपील की है।

सुनील ने यह भी कहा है कि जवाब देने के लिए सरकार को 2० मार्च की शाम तक का समय दिया गया है। इसके पहले रविवार सुबह नक्सलियों ने 18 मार्च की शाम तक का समय दिया था।

नक्सलियों ने कहा है कि बंधक सुरक्षित हैं और उन्हें नियमितरूप से भोजन व आराम सुलभ कराया जा रहा है। राज्य सरकार ने अभी तक नक्सलियों के ताजा प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बोसुस्को पाओलो और क्लाउडिओ कोलैंजेलो दो भारतीयों- संतोष मोहराना और कार्तिक परीदा के साथ 12 मार्च को चार दिवसीय यात्रा पर कंधमाल गए थे। दोनों भारतीय पुरी के निवासी हैं।

14 मार्च की सुबह वे एक नाले के पास बैठे हुए थे। उसी दौरान वहां छह-सात बंदूकधारी पहुंचे। वे चारों के हाथ बांध दिए और आंखों पर पट्टी बांध दी और लेकर जंगल चले गए।

नक्सलियों ने कार्तिक और संतोष को तो 16 मार्च को रिहा कर दिया, लेकिन इटली के नागरिकों को बंधक बनाए रखा। नक्सली नेता सब्यसाची पांडा ने रविवार तड़के स्थानीय मीडिया को भेजे एक ऑडियो संदेश में कहा था कि पर्यटकों को तब अगवा किया गया, जब उन्हें एक नाले के पास कुछ जनजातीय महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें उतारते पाया गया।

पांडा ने मांग की है कि सरकार नक्सल विरोधी अभियानों को रोक दे और उनकी मांगें पूरी करे। नक्सली नेता ने यह भी कहा है कि उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि टूर ऑपरेटर दूरवर्ती इलाकों मे विदेशी पर्यटकों को भ्रमण की अनुमति हासिल करने के लिए प्रशासन को रिश्वत देते हैं।

नक्सली चाहते हैं कि सरकार उनकी 13 सूत्री मांगें पूरी करे। इसमें वे वादे भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार ने पिछले वर्ष बंधकों की रिहाई की एवज में नक्सलियों से किए थे। इन मांगों में नक्सल विरोधी अभियान रोकने, भूमि हस्तांतरण और परियोजनाओं के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ किए गए करार रद्द करने, पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सल समर्थकों के परिजनों को मुआवजा देने और लगभग 600 कैदियों को रिहा करने जैसी मांगें शामिल हैं।

नई मांगों में पर्यटकों को जनजातीय इलाकों से दूर रखना तथा पोस्को और वेदांता जैसी औद्योगिक परियोजनाओं का विरोध करने के मामले में गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाना शामिल है। उड़ीसा के 30 में से करीब 15 जिलों में नक्सली सक्रिय हैं। यह पहली बार है जब नक्सलियों ने विदेशी पर्यटकों को अगवा किया है।

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