DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कंप्यूटर बना कैलकुलेटर

चीनू ने एनी को समझाया कि कंप्यूटर होता क्या है, तो उसे बहुत खराब लगा कि बंकू ने भोले जंगलवालों को बेवकूफ बनाया है। उसने फौरन सोचा कि उसे बंकू को कैसे सबक सिखाना है। अगले दिन वह बंकू के पास पहुंची एक किलो उसकी पसंदीदा मिठाई रबड़ी लेकर और बोली, बंकू, तुमने जंगलवालों को कंप्यूटर देकर बहुत अच्छा किया। अब मैं एक कंप्यूटर केंद्र खोलने जा रही हूं, जहां जंगल वालों को कंप्यूटर चलाना सिखाऊंगी।

इस बार जंगल के चुनावों में बंकू जेब्रा जीत गया। बंकू ने जंगल के जानवरों से कह रखा था कि जीतने के बाद वह सबके घर कंप्यूटर लगवा देगा।
 
एनी हथिनी अपने घर में कंप्यूटर लगने के नाम से बेहद खुश थी। उसने बहुत बढ़िया वाली लकड़ी से कंप्यूटर रखने के लिए मेज बनवायी। मेज जिस दिन बन कर आयी, वह सजधज कर बंकू के घर पहुंच गई। बंकू उस समय अपने मैनेजर जीतू बंदर के साथ मिल कर इसी बात पर माथा-पच्ची कर रहा था कि जंगल वालों को किया प्रॉमिस कैसे निभाए?

एनी हथिनी को देख बंकू घबरा गया। एनी एक अस्पताल में काम करती थी और जंगल के सभी जानवर उसे बहुत चाहते थे। खुद बंकू के कहने पर एनी ने घर-घर जाकर बंकू का प्रचार किया था और उसके कंप्यूटर देने की बात बताई थी। इसी वजह से बंकू इतने अधिक वोटों से जीता था।

एनी ने जैसे ही बंकू को देखा, खुश हो कर बोली, ‘मिनिस्टर जी, कब दे रहे हो कंप्यूटर? मैंने तो अपने लिए एक मेज भी खरीद ली है।’ बंकू हड़बड़ा कर बोला, ‘बस दो-तीन दिन में एनी जी। सबसे पहले आपके ही घर लगेगा कंप्यूटर।’ एनी खुश हो कर वहां से चली गई। बंकू ने जीतू से पूछा, ‘जंगल में कितने घर हैं?’

‘तकरीबन सौ घर सर।’ ‘और उन सौ घरों में कंप्यूटर लगाने का कितना खर्च आएगा?’ ‘एक कंप्यूटर की कीमत पच्चीस हजार होगी, तो मान के चलिए कम से कम पच्चीस लाख तो लग जाएंगे।’

बंकू उछल गया। पच्चीस लाख? इतने पैसे सरकारी खजाने में भी नहीं हैं। उसने सोचा था कि कंप्यूटर कोई मोबाइल जैसी चीज है, हजार रुपए में आ जाएगी।
 
बंकू ने कुछ हिसाब करते हुए जीतू से पूछा, ‘क्या हम कंप्यूटर के बदले जंगलवालों को इससे मिलती-जुलती चीज नहीं दे सकते, जो सस्ती हो?’

जीतू सोचने लगा, कंप्यूटर से मिलती-जुलती चीज क्या हो सकती है? अचानक उसके दिमाग में आयडिया आया, ‘जंगल के जानवरों ने कंप्यूटर का सिर्फ नाम सुना है, देखा नहीं है। आप उन्हें कंप्यूटर के नाम पर जो चाहे दे दीजिए, उन्हें क्या फर्क पड़ेगा?’ बंकू के दिमाग की बत्ती फौरन जल गई। वाकई जंगल के जानवरों को क्या पता चलेगा कि उसने उन्हें कंप्यूटर के नाम पर क्या दिया है?

अगले ही दिन जीतू शहर निकल पड़ा और लौट कर आया, तो अपने साथ कई दजर्न छोटे-बड़े कैलकुलेटर ले आया। जोड़-घटा, गुणा-भाग करने वाले कैलकुलेटर उसे बड़े सस्ते में मिल गए थे। यह देख कर बंकू खुश हो गया। फौरन उसने जंगल के पेपर में छपवा दिया कि जंगल के जानवरों के लिए कंप्यूटर आ गए हैं और वे दफ्तर से आ कर अपना-अपना कंप्यूटर ले जाएं। एनी यह पढ़ कर बहुत खुश हो गई। वह सुबह-सुबह दफ्तर जा कर अपना कैलकुलेटर ले आई। कैलकुलेटर का साइज देख कर वह हताश हो कर बोली, ‘मैंने तो सुना था कि कंप्यूटर बड़े होते हैं। पर यह तो बहुत छोटा है।’ जीतू हंसने लगा, ‘एनी, किस जमाने की बात कर रही हो? दस साल पहले बड़े होते थे कंप्यूटर, अब तो इतने छोटे भी मिलते हैं कि जेब में रख लो।’

एनी को लगा कि फालतू में ही उसने कंप्यूटर की वजह से मेज खरीद ली। जंगल में बहुत कम लोगों को पता था कि एनी का बेटा डोडो अमेरिका में कंप्यूटर मास्टर है। उस रात एनी ने डोडो को फोन पर कहा—पता है, बंकू ने हम सब जानवरों को कंप्यूटर दिया है।

डोडो खुश होते हुए बोला—मम्मी, फिर तुम फोन पर बात कर पैसे क्यों खर्च कर रही हो? ई मेल करो ना या फेस बुक पर अपना अकांउट खोलो। हम मुफ्त में घंटों चैट कर सकते हैं। एनी ने फोन पर डोडो से समझने की कोशिश की कि कंप्यूटर कैसे चलता है। पर उसे तो अपने कैलकुलेटर में कोई स्क्रीन दिखा ही नहीं। डोडो ने कुछ खीझते हुए कहा—अच्छा मम्मी, मेरा एक दोस्त बगल के जंगल में कंप्यूटर की दुकान चलाता है। मैं उससे कहूंगा कि घर आ कर कंप्यूटर फिट कर दे और तुम्हें सिखा भी दे कि चैट कैसे किया जाता है।

दो दिन बाद डोडो का दोस्त चीनू बंदर आया तो कंप्यूटर की जगह कैलकुलेटर देख चौंक गया। एनी से कहने लगा, ‘आंटी, आपको लगता है किसी ने बेवकूफ बनाया है। मुझे यह तो पता था कि इस जंगल में किसी को कंप्यूटर के बारे में जानकारी नहीं है, पर कैलकुलेटर को कंप्यूटर कैसे समझ सकते हो?’

एनी चौंकी, ‘तो ये कैलकुलेटर है, कंप्यूटर नहीं?’
चीनू ने एनी को समझाया कि कंप्यूटर होता क्या है, तो उसे बहुत खराब लगा कि बंकू ने भोले जंगलवालों को बेवकूफ बनाया है।

उसने फौरन सोचा कि उसे बंकू को कैसे सबक सिखाना है। अगले दिन वह बंकू के पास पहुंची एक किलो उसकी पसंदीदा मिठाई रबड़ी ले कर और बोली, बंकू, तुमने जंगलवालों को कंप्यूटर दे कर बहुत अच्छा किया। अब मैं एक कंप्यूटर केंद्र खोलने जा रही हूं, जहां जंगल वालों को कंप्यूटर चलाना सिखाऊंगी। पता है, इस काम के लिए मैं अमेरिका से एक बहुत बड़े एक्सपर्ट को बुला रही हूं। यह सुनते ही बंकू के होश उड़ गए। अमेरिका से एक्सपर्ट आएगा यानी उसकी पोल खुल जाएगी। अगले दिन एनी ने अपने घर के सामने बड़ा सा बोर्ड लगवा लिया—कंप्यूटर लर्निग सेंटर। जंगल के जानवर अपना-अपना कैलकुलेटर ले कर उसके पास आने लगे और उसी रात बंकू अपना बोरिया बिस्तर बांध कर जंगल से चंपत हो गया।

जंगलवालों को समझ आ गया कि बंकू ने उन्हें बेवकूफ बनाया है और बाकी नॉलेज तो उन्हें असली कंप्यूटर से मिलना ही था, जो चीनू की मदद से जंगल में आखिरकार आ ही गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कंप्यूटर बना कैलकुलेटर