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अपनों, सहयोगियों ने बढ़ाया भाजपा का सिरदर्द

यूपीए में जारी उठापटक से मध्यावधि चुनाव के सपने बुन रही भाजपा अपने ही नेताओं की बगावत में फंस गई है। बिहार व झारखंड में पार्टी के सहयोगियों ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।

एक तरफ कर्नाटक का संकट गहराया तो दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव में जदयू की हठ से भाजपा के उपनेता एसएस अहलूवालिया अपनी दावेदारी से चूक गए। उधर, देर शाम वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने झारखंड में अंशुमान मिश्रा के खिलाफ पार्टी को चुनौती दे डाली।

सोमवार को पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व तमाम संकटों से घिरा रहा। कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने अध्यक्ष नितिन गडकरी व प्रभारी अरुण जेटली से साफ कर दिया कि वह सीएम की कुर्सी से कम कुछ नहीं मानेंगे।

गडकरी ने कहा कि येदियुरप्पा को जिस वजह से हटाया गया था वह मामला खत्म हो गया और इस संबंध में विचार शुरू हो गया है। जेटली ने भी ऐसे ही संकेत दिए मगर येदियुरप्पा ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतार ही दिया। उनके समर्थन में 12 सांसदों ने इस्तीफे की धमकी भी दे डाली। बाद में भाजपा ने येदियुरप्पा समर्थक उम्मीदवार बीजे पुट्टास्वामी को पार्टी से निलंबित कर दिया।

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इनकार के बाद अहलूवालिया राज्यसभा में लौटने से चूक गए। उधर, यशवंत सिन्हा ने पार्टी नेतृत्व से कहा है कि  राज्यसभा चुनाव में मिश्रा का समर्थन किया तो वह पार्टी से किनारा कर सकते हैं। सिन्हा ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि उन्हें जो कहना है वह पार्टी से कह चुके हैं। मिश्रा ने निर्दलीय पर्चा भरा है। भाजपा ने उन्हें समर्थन के संकेत दिए हैं।

 

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