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जवानों को रासायननिक हमले से बचाएगा ‘मैक 5’

अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश भी इस वक्त आतंकी हमलों में रासायनिक जैविक और रैडियोधर्मी हथियारों के इस्तेमाल की आशंका सताती है। इस चुनौती से निपटने के लिए सभी देश अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं और भारत भी पीछे नहीं है।

वर्तमान में डीआरडीओ इस्तेमाल में लाए जाने वाले एनबीसी (न्यूक्लियर बायोलोजिक्ल कैमिकल) ‘मैक 4’ सूट की नेक्ट जेनरेशन ‘मैक 5’ सूट बनाने में जुटी है। इसे लेकर कई तरह के प्रयोग डीआरडीओ में किए जा रहे हैं।

‘मैक 5’ अपने आप में योद्धाओं को बचाने के लिए सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। इसे पहनने वाले सैनिक रसायनिक बम से प्रभावित क्षेत्रों में आसानी से जा सकेंगे। पैराशूट फैक्ट्री के महाप्रबंधक आर रविशंकर ने बताया कि डीआरडीओ में मैक 4 में सुधार चल रहा है। छह महीने बाद ट्रायल पर सूट का उत्पादन किया गया जाएगा। अगले साल ‘मैक 5’ के भी ऑडर मिलने लगेगा।

‘मैक 5’ की खासियत
-कार्बन कोटिंग की मोटी लेयर लगे होने के कारण रसायनिक हथियार प्रभावित क्षेत्रों में होने वाली कई तरह की जहरीली गैसों को यह सूट आसानी से सोखने की क्षमता रखता है।
 -इस सूट में दो जगह मीटर लगाने की भी जगह दी गई है। जिससे इसे पहनने वाले सैनिक को यह पता चलता रहेगा कि वह कितनी देर और उस क्षेत्र में रह सकता है।
-इसके अलावा मैक 5 को वजन में दो किलो रखा गया है, जो कि मैक 4 से डेढ़ किलो कम है। जिससे सैनिकों को इसे पहनने ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

मैक 4 एक नजर में
- अब तक सेना को दे चुके हैं 40 हजार पीसेस, एक्टीवेटेड कार्बन स्पीहर से बना है
- आग से बचने वाली मटीरीयल से बनी हुई है ऊपरी सतह, इसका वजन 3.5 किलो है

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