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मांगें न मानी गयीं तो 28 के बाद नहीं दौड़ेगी ट्रेनें

वेतन विसंगति दूर करने, रिक्त पदों पर भर्ती, कर्मचारी पुत्र को नौकरी देने जैसी मांगों के समर्थन में रेलवे यूनियनें संयुक्त रूप से 28 मार्च को संसद भवन का घेराव करेगी। मांगें न माने जाने पर आन्दोलन को आगे बढ़ाते हुए 28 मार्च के बाद पूरे देश में रेल संचालन ठप किया जाएगा।

यह बात ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने सोमवार को कही। लहरतारा स्थित पूर्वात्तर रेलवे के डीआरएम कार्यालय के बाहर आम सभा में उन्होंने कहा कि पूरे देश के रेलवे कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है। यूपी की हालत और खराब है। यहां तो कई वे सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं जो देश के अन्य रेल कर्मचारियों को मिल रही है। इसका कारण विभागीय लापरवाही हैं। रेलवे बोर्ड के आदेश को दरकिनार करते हुए मुख्यालय और मंडल रेल कार्यालय के खिलाफ अब आवाज उठानी पड़ेगी। अधिकारों की रक्षा के लिए ‘रेल बचाओ देश बचाओ’ नारे के साथ सभी यूनियन के सदस्य 28 मार्च को दिल्ली पहुंचें।

नहीं होने देंगे निजीकरण
नारों के बीच शिवगोपाल मिश्र ने कर्मचारियों को उत्साहित करते हुए कहा, सिर्फ नारेबाजी से काम नही चलेगा, सड़कों पर उतरना होगा। रेल ही हमारी मां और जीवनदायिनी भी। इसकी रक्षा हमारा कर्तव्य है। हम रेलवे का निजीकरण नहीं होने देंगे। मुनाफा कमाने के लिए मल्टीनेशनल कम्पनियों के हाथ में इसे सौंपने की साजिश हो रही है। 14 राज्यों के 2 करोड़ कर्मचारियों और 4 लाख इससे सम्बंधित वेंडर, टैक्सी, रिक्शाचालक, ठेकेदार आदि का भी पेट रेलवे से ही भरता है। 

आत्मीयता भी दर्शायी
दोपहर 1.30 बजे काफिले के साथ महामंत्री शिवगोपाल मिश्र आमसभा में पहुंचे तो 10 मिनट तक नारेबाजी ही होती रही। नेताजी ने बोलना शुरू किया समर्थक फिर उत्साह से लबरेज। आखिर इन्हें बोलना पड़ा, माला और मांग का बड़ा रिश्ता होता है। मैं समझ रहा हूं कि यह नारे और माला क्यों लादे जा रहे हैं। बैठ जाइये, बेहतर है कि कर्मचारी हित में दिल्ली चलते वक्त यही नारा लगाएं। स्थानीय कर्मचारियों की नब्ज पकड़ते हुए बीच-बीच में वह सुरेन्द्र भइया, शुक्लाजी, बाबूलाल को भीड़ में देखते ही भाषण रोकते और उनसे हालचाल पूछते रहे।

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