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जन्मोत्सव पर तो दीजिए स्वच्छ बूंद ‘ जिदंगी’ की

कितनी अजीब विडम्बना है। 29 मार्च को पतित पावनी यमुना मैया का जन्मोत्सव है, ब्रज में पूजा करेंगे, पाठ करेंगे। जल से स्नान करेंगे, मगर यमुना मैया को तोहफा क्या देंगे? शायद शासन-सत्ता से लेकर प्रशासन और ब्रजवासियों के पास यही जवाब बनेगा कि प्रदूषण और गंदगी के साथ कसैला पानी। इसी जल में सब नहाएंगे, इसी में लेंगे आचमन। जरा गौर करिये।

यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने पर जापान सरकार की मदद से करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाने के बाद भी कालिंदी का जल कसेला और काला नजर आता है। यमुना जल कितना घातक हो चुका है यह तो जांच रिपोर्ट पहले भी खुलासा करती आ रही हैं। यहां तक कि श्रद्धालु आचमन तक से घबराते हैं। इसके बाद भी हालात सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।

ब्रज की पहचान यमुना महारानी का जल लगातार विषैला होता जा रहा है। मथुरा और वृंदावन में गंदे नालों का पानी सीधे यमुना में जा रहा है। पम्पिंग स्टेशनों और सीव्रेज प्लांटों के लगातार काम न कर पाने से यमुना एक्शन प्लान का सिस्टम कतई राहत नहीं दे पा रहा है। जब-जब यमुना सेवियों ने यमुना एक्शन प्लान के तंत्र और मशीनी व्यवस्था को जांचा परखा तो हालात ज्यादा अच्छे नहीं मिले। कहीं पम्पिंग स्टेशनों पर जनरेटरों को डीजल नहीं है तो कहीं बिजली नहीं मिलने और जनरेटर नहीं चलने से सिस्टम बंद रहने की शिकायत प्रशासन तक पहुंची।

कमोवेश यही हालत यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी एडीएम रामऔतार रमन के निरीक्षणों में सामने आई। पिछले दिनों में ही दो बार किये गये निरीक्षणों के नतीजे ढाक के तीन पात रहे हैं। मथुरा और वृंदावन नगर पालिका परिषदों के कर्मचारियों ने उनके निर्देशों पर गौर तक नहीं किया। यमुना में प्रदूषण गिरने के ताजा मामले ने यमुना को काफी प्रदूषण कर डाला।

पता चला है कि राल ड्रेन से मसानी पम्प¨ग स्टेशन तक एक साइफन आती है। जिसका प्रयोग बरसाती पानी की निकासी के लिए किया जाता है। इसकी वजह यह भी है कि बरसात के समय पानी को पम्प¨ग नहीं किया जाता। ऐसे में यहां अड़ीग के समीप ड्रेन की साइफन पर पानी को बंद किये जाने के लिए सिंचाई विभाग बांध लगा देते है।

जिसे किसान सींचपाल से मिलकर जब चाहे तोड़ कर सिंचाई के लिए पानी लेने लगते हैं। इसका नुकसान यमुना को तब होता है जब साइफन से पानी यमुना की ओर आने लगता है। ऐसा एक सप्ताह पूर्व भी साइफन टूटने से हुआ था। इसी का दबाव नहीं सहने के कारण यमुना के पीएमपी एसटीपी की दीवार टूटने से पानी कालोनी में घुस गया था और यमुना में सीधा गिरता रहा।

ऐसा ही रविवार को भी हुआ। यह पानी नालों में जमी गंदगी को साथ लेकर यमुना में गिरता है। इससे यमुना में जमकर गंदगी घुसती रही। हैरत की बात है कि इस मामले में प्रशासन किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर सका। यहां तक कि जांच कराना तक मुनासिब नहीं समझा गया।

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