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मायावती की राह पर अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लम्बी जद्दोजहद के बाद मंत्रियों के विभागों का बंटवारा तो कर दिया, लेकिन इस मामले में वह पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती की राह पर ही चलते दिखाई दिए।

वर्ष 2007 में सूबे की मुख्यमंत्री बनने के बाद मायावती ने लगभग 41 महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे थे। अब अखिलेश ने भी करीब 50 से अधिक विभागों को अपने पास रख सत्ता की चाबी अपने हाथों में ही रखने के संकेत दिए हैं। या यह भी कह सकते हैं कि महत्वपूर्ण विभागों को लेकर उन्हें अपने सिपहसलारों पर ज्यादा यकीन नहीं है।

अखिलेश, अलबत्ता मायावती से अधिक कंजूस साबित हुए हैं। मायावती ने वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री बनने के बाद सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गृह, सतर्कता, नियुक्ति, कार्मिक और वित्त सहित 41 विभाग अपने पास रखे थे।

वहीं अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2003 में सूबे की सत्ता सम्भालने के बाद लगभग दो दजर्न विभागों की जिम्मेदारी पास रखी थी। मायावती ने अपने शासनकाल में सहकारिता, गन्ना, उच्च शिक्षा, आवास विकास, आबकारी और ऊर्जा सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी अपने करीबीयों- नसीमुददीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य, बाबूसिंह कुशवाहा, रंगनाथ मिश्र और राकेशधर त्रिपाठी जैसे कुछ खास सिपहसलारों को सौंपे थे, लेकिन अखिलेश ने इन विभागों को भी अपने पास रख लिया है।

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अभयानंद शुक्ल कहते हैं कि सत्ता और शक्तियों के केंद्रीकरण से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। शासन व प्रशासन भी पारदर्शी नहीं रह पाते। पिछले कुछ वर्षो में ऐसी सरकारें बनीं, जो एक ही रास्ते पर चलती दिखाई दे रही हैं।

शुक्ला ने कहा कि 50 से अधिक विभागों को अपने पास रखने से तो यही संदेश जाता है कि मुख्यमंत्री सारी ताकत अपने हाथों में ही रखना चाहते हैं।

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