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इटली के अगवा पर्यटकों का कोई सुराग नहीं

ओडिशा में नक्सलियों द्वारा पांच दिन पहले अगवा किए गए इटली के दो पर्यटकों के बारे में अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इस बीच प्रशासन ने सोमवार को पर्यटकों की रिहाई की कोशिश तेज कर दी है। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी।

राज्य के गृह सचिव यू.एन. बेहरा ने कहा कि सरकार बोसुस्को पाओलो (54) और क्लौडिओ कोलैंजेलो (61) की सुरक्षित रिहाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। दोनों को 14 मार्च को ही अगवा कर लिया गया था, लेकिन इसकी जानकारी शनिवार रात प्रकाश में आई थी।

स्थिति से निपटने का रास्ता निकालने के लिए शीर्ष पुलिस एवं प्रशासिनक अधिकारियों ने रविवार और सोमवार को कई बैठकें की। बेहरा ने कहा कि नक्सलियों ने अभी तक हमसे किसी तरह का सम्पर्क नहीं किया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बंधकों तक पहुंचने के लिए कोई तलाशी अभियान चला रही है, या नक्सल विरोधी अभियान रोकने की योजना बना रही है, बेहरा ने कहा कि मैं आपको इस प्रश्न का जवाब दे पाने में असमर्थ हूं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने रविवार को कहा था कि सरकार नक्सलियों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने अपहर्ताओं से यह भी अपील की थी कि उन्हें सरकार से सम्पर्क करना चाहिए।

सरकार ने इसके पहले कहा था कि इटली के पर्यटकों को गंजाम और साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील कंधमाल जिले की सीमा पर शनिवार को अगवा किया गया था। लेकिन विस्तृत विवरण तब सामने आया, जब पर्यटकों के साथ रहे दो प्रत्यक्षदर्शियों ने रविवार को पुलिस के समक्ष घटना की विस्तृत जानकारी दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बोसुस्को पाओलो और क्लौडिओ कोलैंजेलो दो भारतीयों- संतोष मोहराना और कार्तिक परीदा के साथ 12 मार्च को चार दिवसीय यात्रा पर कंधमाल गए थे। दोनों भारतीय पुरी के निवासी है।

14 मार्च की सुबह वे एक नाले के पास बैठे हुए थे। उसी दौरान वहां छह-सात बंदूकधारी पहुंचे। वे चारों के हाथ बांध दिए और आंखों पर पट्टी बांध दी और लेकर जंगल चले गए। नक्सलियों ने कार्तिक और संतोष को तो 16 मार्च को रिहा कर दिया, लेकिन इटली के नागरिकों को बंधक बनाए रखा।

पुरी के जिला पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार साहू ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और अपहर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नक्सली नेता सब्यसाची पंडा ने रविवार तड़के स्थानीय मीडिया को भेजे एक आडियो संदेश में कहा था कि पर्यटकों को तब अगवा किया गया, जब उन्हें एक नाले के पास कुछ जनजातीय महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें उतारते पाया गया।

पंडा ने मांग की है कि सरकार नक्सल विरोधी अभियानों को रोक दे और उनकी मांगें पूरी करे। नक्सली नेता ने यह भी कहा है कि उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि टूर ऑपरेटर दूरवर्ती इलाकों मे विदेशी पर्यटकों को भ्रमण की अनुमति हासिल करने के लिए प्रशासन को रिश्वत देते हैं।

नक्सली चाहते हैं कि सरकार उनकी 13 सूत्री मांगें पूरी करे। इसमें वे वादे भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार ने पिछले वर्ष बंधकों की रिहाई की एवज में नक्सलियों से किए थे। इन मांगों में नक्सल विरोधी अभियान रोकने, भूमि हस्तांतरण और परियोजनाओं के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ किए गए करार रद्द करने, पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सल समर्थकों के परिजनों को मुआवजा देने और लगभग 600 कैदियों को रिहा करने जैसी मांगें शामिल हैं।

नक्सलियों ने उन सभी विस्थापन विरोधी नेताओं को भी रिहा करने की मांग की है, जिन्हें पास्को और वेदांता जैसी विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

ज्ञात हो कि राज्य के आधे से अधिक, 30 जिलों में नक्सली सक्रिय हैं, और कंधमाल जिला नक्सलियों का गढ़ माना जाता है।
 

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