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बेरोजगारी भत्ते के लिए उम्र की बंदिश से युवा मायूस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव के शपथ ग्रहण करने से पहले तक बेरोजगारी भत्ते को लेकर सेवायोजन कार्यालयों में युवाओं की बेहद मारामारी थी। लेकिन यह स्पष्ट होने के बाद कि इसके लिए उम्र की न्यूनतम सीमा 35 साल है, युवाओं में थोड़ी मायूसी है। अधेड़ उम्र के बेरोजगारों की भीड़ से निपटने में हालांकि अब भी अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। बेरोजगारों के पंजीयन अब तहसीलवार करवाए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने घोषणा-पत्र में 35 साल से अधिक की उम्र के शिक्षित बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का उल्लेख किया था, लेकिन सपा नेता अपने चुनावी भाषण में सिर्फ यह कहते रहे कि शिक्षित बेरोजगारों को एक हजार रुपये का मासिक भत्ता दिया जाएगा।

इसी मुगालते में पांचवें और छठे चरण के मतदान के बाद जिला स्तरीय सेवा योजन कार्यालयों में युवाओं की भीड़ हजारों की तादाद में पंजीयन के लिए उमड़ पड़ी। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को कई जगह लाठी भी चलानी पड़ी। लेकिन युवाओं की उम्मीदों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले सप्ताह गुरुवार को शपथ-ग्रहण के बाद बुलाई गई मंत्रिमंडल की बैठक में बेरोजगारी भत्ते के लिए शैक्षणिक योग्यता कम से कम 1०वीं पास और न्यूनतम उम्र सीमा 35 वर्ष निर्धारित किए जाने का खुलासा किया।

बांदा में पंजीयन करा चुके 26 वर्षीय बृजेश कुमार के अनुसार, ''सपा का घोषणा पत्र लोगों के बीच वितरित नहीं किया गया। सपा नेता चुनावी जनसभाओं में सिर्फ बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की बात कहते रहे, जिससे उम्र की सीमा पर पर्दा पड़ा रहा। इसी भ्रम में कई युवाओं ने पंजीयन करा लिया।''

सपा के प्रदेश सचिव रामअवतार शिवहरे ने कहा कि मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए भी राज्य सरकार ने 35 साल से अधिक उम्र वालों को ही भत्ता दिया था। इस बार भी पार्टी ने घोषणा-पत्र में उम्र का स्पष्ट उल्लेख किया था।

बेरोजगारी भत्ते के लिए न्यूनतम उम्र सीमा स्पष्ट होने के बाद हालांकि पंजीयन कार्यालयों में भीड़ कम हुई है, लेकिन अधेड़ों की भीड़ बढ़ गई है, जिससे अधिकारियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही। भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन तमाम कदम उठा रहा है।

बांदा की जिलाधिकारी शीतल वर्मा के अनुसार, ''बांदा सदर, नरैनी, अतर्रा व बबेरू में पंजीयन के लिए चार-चार काउंटर खोले गए हैं और थानाध्यक्षों को सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं।''

उधर, सेवा योजन कर्मचारियों पर अवैध वसूली के भी आरोप भी लगने लगे हैं। शनिवार को बांदा की अतर्रा तहसील में पंजीयन कराने पहुंचे बदौसा गांव के 42 वर्षीय देव कुमार यादव ने कहा कि तुरंत पंजीयन के लिए 50 रुपये और कतार के जरिये पंजीयन के लिए पांच रुपये वसूले जा रहे हैं।

नि:शुल्क दिए जाने वाले प्रपत्र भी बेरोजगारों को 10-20 रुपये में मिल रहे हैं। इस बारे में बांदा के जिला सेवा योजन अधिकारी एपी शुक्ल ने कहा कि जितने पंजीयन सालभर में नहीं हो पाते थे, उससे हजार गुना अधिक इस महीने के पहले 15 दिन में हो गए हैं। इसलिए कार्यालयों में प्रपत्र नहीं बचे हैं। ऐसे में लोगों को बाजार से ऊंचे दाम पर इन्हें खरीदना पड़ रहा है।

 

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  • Web Title:बेरोजगारी भत्ते के लिए उम्र की बंदिश से युवा मायूस