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ममता के कहने पर माने दिनेश त्रिवेदी

रेल बजट में यात्री किराया बढ़ाने को लेकर अपनी पार्टी की नाराजगी के बाद पांच दिन से जारी नाटक पर दिनेश त्रिवेदी ने आखिरकार विराम लगा दिया। अपने बगावती तेवर में नरमी लाते हुए त्रिवेदी ने रविवार रात को अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की मांग मान ली। वह रेल मंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हो गए हैं।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का दावा है कि त्रिवेदी ने खुद फोन कर कहा कि वह पार्टी का फैसला मानने को तैयार हैं। इसके बाद ममता ने फौरन उन्हें त्यागपत्र देने की हिदायत दी। साथ ही, तृणमूल प्रमुख ने कहा कि त्रिवेदी ने उन्हें बताया कि वह पार्टी के साथ ही रहेंगे।

ममता ने दिल्ली रवाना होने से पहले कोलकाता में खुद यह जानकारी दी कि त्रिवेदी इस्तीफे को तैयार हो गए हैं। सोमवार को वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करेंगी। इससे पहले तक त्रिवेदी बगावती तेवर दिखाते अड़े हुए थे कि जब तक ममता लिखित में नहीं देतीं, वह इस्तीफा नहीं देंगे।

ममता को फोन कर पार्टी का फैसला मानने से पहले उन्होंने कहा था कि वह मंत्रालय से चिपके नहीं रहना चाहते हैं, लेकिन वहां से भागना भी नहीं चाहते। मंत्रालय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। रेलवे किसी की जागीर नहीं है। तृणमूल कांग्रेस दिनेश त्रिवेदी की जगह मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाना चाहती है। लेकिन सरकार का एक धड़ा मुकुल को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपने के हक में नहीं है।

30 तक टालने की कोशिश: अमूमन संसद सत्र के दौरान कैबिनेट में बदलाव नहीं किया जाता है। ऐसे में सरकार ममता को यह समझाने की कोशिश करेगी कि नए रेल मंत्री को 30 मार्च के बाद शपथ दिला दी जाएगी। लेकिन ममता के मानने की उम्मीद कम ही है।

वहीं, रेल बजट पर तृणमूल प्रमुख की किराये में कटौती की मांग को मानते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी बजट पर चर्चा का जवाब दे सकते हैं। ऐसे में सोमवार को रेल बजट पर चर्चा शुरू होने की संभावना भी कम है। प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस का जवाब देने के बाद नियम 193 के तहत सरकार की नीतियों का कर्मचारियों पर प्रभाव विषय पर चर्चा कराई जा सकती है।

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