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नोकझोंक के बाद नाखुश विपक्ष का वाकआउट

रांची ’ हिन्दुस्तान ब्यूरो। विपक्ष ने सरकार से पूछा कि वह 16,300 करोड़ के बजट के लिए आतंरिक स्रेत कहां से जुगाड़ करेगी। जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार आतंरिक स्रेत बढ़ाने के लिए उपाय तलाशेगी। सरकार के जवाब से नाखुश विपक्ष सदन से बाहर चला गया। इससे पहले कई मौकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक चलती रही।

माले विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि सरकार का बजट कोरी कल्पना पर आधारित है। बजट असमानता को और बढ़ाने वाला है। वैट बढ़ाने से महंगाई बढ़ेगी। उन्होंने पूछा : सरकार बताये कि आम लोगों की आय कैसे बढ़ेगी ?

माधवलाल सिंह ने कहा : पिछले बजट का महज 35 फीसदी हिस्सा ही खर्च हो पाया। ईचागढ़ विधायक अरविंद सिंह ने कहा कि बजट के लिए सरकार ने रोड़ाैप तक तैयार नहीं किया। महंगामा विधायक राजेश रंजन ने कहा कि सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में महज 30 फीसदी राशि खर्च की।

सत्ता पक्ष का बचाव बड़कुंवर गगरई, विद्युतवरण महतो और उमाशंकर अकेला ने किया। एक टाउन हाल तक नहीं बनाबड़कुंवर गगरई बजट और सरकार की तारीफ कर रहे थे। उनकी बात सुनकर स्पीकर ने टोका, कहा- आप तो सरकार का जवाब मानो पढ़ रहे हैं, अपनी बात कहें।

स्पीकर ने कहा कि सरकार तो दस साल में रांची जैसे मुख्यालय में एक टाउन हाल तक नहीं बना पाई। इस पर गगरई ने कहा- प्रस्ताव है अध्यक्ष महोदय। विस अध्यक्ष ने पूछा- कब तक? गगरई ने कहा- अगले वित्तीय वर्ष में। रघुवर दास ने कहा कि बजट और विकास एक दिन की प्रक्रिया नहीं होती है।

यह सतत चलने वाली होती है। बदला जा रहा है रजिस्टर कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह ने सदन को सूचना देते हुए कहा कि सीसीएल गेस्ट हाउस का रजिस्टर बदला जा रहा है। रूम एलाटमेंट किसने कराया है, को बदलने की कोशिश की जा रही है।

सीसीएल के अधिकारी और पुलिस अफसर आपस में मिले हैं। इसकी जांच कराई जाए। इस पर विस अध्यक्ष ने कहा-जांच करायेंगे। सिंह ने कहा- तब तक तो पूरा रजिस्टर ही चेंज हो जायेगा। कांग्रेस देने को हाथ फैलाए हैचर्चा में माधवलाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस तो देने के लिए हाथ फैलाये बैठी है।

लेने वाला कोई होना चाहिए। हर चीज में केंद्र पर दोष देना ठीक नहीं है। यहां तो टीचर तक स्कूल में नहीं रहते। बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे टीचर बोरो प्लेयर की मदद लेते हैं। यहां तो लूटो, काटो और बाड़ा बांधो का धंधा चल रहा है। काम पर विश्वास करते हैंजब वित्त मंत्री सदन में बोल रहे थे, तो विपक्ष ने हो हंगामा करते हुए कहा कि आपका बजटीय भाषण हम लोगों ने सुन लिया है।

आज भी वही भाषण दे रहे हैं। यह भाषण नहीं चलेगा। इस पर वित्त मंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि हम लोग भाषण पर विश्वास नहीं करते हैं। हम लोग काम पर विश्वास करते हैं। झारखंड सरकार बड़ी तेजी से काम कर रही है। बूढ़े होकर करते हैं तमाशा जब विपक्ष ने वित्त मंत्री के भाषण पर वाक आउट कर दिया, तो समरेश सिंह सरकार पर कटाक्ष करते हुए बाहर निकले।

इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि आप लोग बूढ़े होकर भी तमाशा करते हैं। यह ठीक बात नहीं। आप लोगों की बात हमलोगों ने धैर्य से सुनी था। आप लोग भी हमारी बात धैर्य से सुनिये। मगर आप लोगों में धैर्य नहीं। जब पच गया, तो बोल रहे हैंजिस समय वित्तमंत्री बोल रहे थे, विपक्षी विधायक शोरगुल कर रहे थे।

समरेश सिंह भी शोरगुल में शामिल थे। इसपर विस अध्यक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि माननीय सदस्य, आप लोग हल्ला क्यों कर रहे हैं। हेमंत जी ने परसों आप लोगों को भोजन भी अच्छा कराया था। इसप्रकार समरेश सिंह ने कहा-दाल में नमक ज्यादा थी। जबाव में हेमंत ने कहा- जब पचा गये तो बोल रहे हैं। पहले बोलना अच्छा रहता।

विधायक कोटा पांच करोड़ होझामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रोम ने कहा कि विधायक कोटे से तीन करोड़ मिलता है। इसे पांच करोड़ कर दिया जाये। गांवों में बिजली की स्थिति बदतर है। रोज ट्रांसफारमर जल रहे हैं। दो करोड़ की राशि हम लोग सिर्फ बिजली पर खर्च करेंगे।

इस पर वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार विचार करेगी। लोबिन नहीं माने। कहा- सरकार सदन में घोषणा करे। वित्तमंत्री ने कहा कि ट्रांसफारमर बदलने मात्र से बिजली व्यवस्था दुरुस्त हो जायेगी, इसकी गारंटी नहीं है। तार की भी हालत खराब है। लोड नहीं संभाल पायेगी।

इस मांग पर विचार करने के बाद ही घोषणा की जा सकती है। केंद्र का बजट इटली से आया बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्षी विधायकों के बीच नोकझोंक चलती रही। हेमंत ने कहा कि 15 को हमने बजट पेश किया है। 16 को केंद्र का बजट आया है।

दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। इतना सुनते ही विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह ने पूछा- केंद्र में तो प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह आहलूवालिया जैसे इकोनामिस्ट हैं। आपके पास कौन अर्थशास्त्री हैं।

इस पर हेमंत ने कहा कि हमलोग मिलजुल कर बजट बनाये हैं। कहां केंद्र और कहां झारखंड। बजट को देखकर भी लगता है। रघुवर दास ने चुटकी लेते हुए कहा कि केंद्रीय बजट मल्टीनेशनल कंपनी का बजट है। यह इटली से आया है। इतना सुनते ही पक्ष के विधायक ठहाका लगाने लगे।

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