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आदिवासियों को दर्शनीय वस्तु न समझा जाए: सव्यसाची पंडा

नक्सली चीफ सव्यसाची पंडा ने मीडिया को जारी अपने कैसेट में कहा है कि आदिवासियों को दर्शनीय वस्तु न समझा जाए। प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन पर ही कंधमाल, गंजाम, कोरापुट, मालकानगिरि एवं रायगढ़ जिलों के आदिवासी बहुल इलाकों में विदेशी सैलानी आते हैं और गरीब आदिवासियों का मजाक उड़ाते हैं।

वर्षों से आदिवासी जमीन के लिए जंग कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। पंडा ने कहा है कि विदेशी सैलानियों की रिहाई के बदले उन्होंने अपनी 13 सूत्री मांग सरकार के समक्ष रखी है। 18 मार्च की शाम तक यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो विदेशी सैलानियों के जीवन के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

नक्सलियों की कुछ मांगें इस प्रकार हैं-
1. एक माह के भीतर आदिवासी जमीन विवाद का फैसला।
2. कंबिंग ऑपरेशन बंद।
3. ऑपरेश ग्रीन हंट बंद।
4. पोलाभरम परियोजना बंद।
5. उड़ीसा की जेलों में बंद नक्सली नेताओं की रिहाई।
6. छह सौ निदरेष ग्रामीणों की रिहाई।
7. सीआरपीएफ की वापसी।
6. नक्सली नेता गणनाथ पात्र एवं शुभश्री पंडा की बिना शर्त रिहाई।

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