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तीन साल में एक भी रपट दर्ज नहीं!

सोनभद्र। निज संवाददाता।

राबर्ट्सगंज मुख्यालय पर तीन साल से महिला थाना अस्तित्व में है। इस दरम्यान एक भी रपट दर्ज न होना इसके औचित्य पर सवाल उठाने लगे हैं। और तो और, अब तक महिला दरोगा की तैनाती नहीं हो सकी। इंचार्ज विहीन महिला थाने में तमाम अव्यवस्थाएं हैं।

काम चलाने के लिए किसी पुरुष दरोगा को महिला थाने का इंचार्ज बना दिया जाता है। इस पर भी रपट नहीं दर्ज होती है।शासन के मंशा के अनुरूप महिलाओं के हित में महिला थाने खोले गये। बावजूद इसके जिले में महिला थाने के औचित्य पर प्रश्नचिह्न् लगने लगा है। वर्तमान में एसपी ने महिला नाम वाले पुरुष दरोगा को थाने का इंचार्ज बना दिया है। बाहरी लोग उसे भले महिला समङो, स्थानीय लोग सबकुछ जानते हैं।

वर्ष 2009 में सोनभद्र जिले में महिला थाना खुला। इस पर महिलाओं ने संतोष जाहिर किया। आज तक एक भी महिला दरोगा की तैनाती न होने से स्थिति विषम है। बार-बार महिला थाने के इंचार्ज के बारे में पूछे जाने पर एसपी ने दरोगा भागवत सिंह को महिला थाने का इंचार्ज बना दिया।

इसके बाद लोगों ने खूब ठहाके लगाये। वह इस पद से हट गये। उसके बाद फिर इंचार्ज विहीन थाना हो गया था। हाल में पुलिस अधीक्षक मोहित अग्रवाल ने सोची-समझी रणनीति के तहत बड़े ही चालाकी से महिला नाम से मेल खा रहे पुरुष दरोगा आशाराम गोयल को महिला थाने का इंचार्ज बना दिया है। आशा नाम से बाहरी लोग यही समझते हैं कि महिला दरोगा होगी लेकिन बातचीत से सच्चाई का खुलासा होता है। मजे की बात यह है कि लोग तो फोन लगाने के बाद पुरुष की आवाज सुनकर चौक जाते हैं कि कहीं गलत जगह तो फोन नहीं लग गया है।

प्रदेश में महिला दरोगाओं की कमी है। इससे जिले में पुरुष दरोगा को इंचार्ज बनाया गया है। यही वजह है कि आज तक एक भी महिला थाने में रपट दर्ज नहीं की जा सकी है। अभी तक सभी मामले राबर्ट्सगंज कोतवाली में दर्ज कराये जा रहे हैं। उम्मीद है कि एक माह बाद महिला थाना अपने नये भवन में संचालित होने लगेगा। इसके बाद सभी दिक्कतें दूर हो जायेंगी। मोहित अग्रवाल, पुलिस अधीक्षकइनसेट : महिला थाने के स्टॉफ पर गौर करें तो मौजूदा समय में महिला थाने के इंचार्ज आशाराम गोयल, एसआई एसपी चौधरी, हेड कांस्टेबिल मधु पनिका समेत 29 महिला पुलिस कार्यरत हैं।

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  • Web Title:तीन साल में एक भी रपट दर्ज नहीं!