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डिजिटल टीवी की क्रांतिकारी शुरुआत

मौजूदा केबल टीवी के स्थान पर टीवी प्रसारण का डिजिटलीकरण करने संबंधी पहल में इस तीस जून तक चारों महानगरों में डिजिटल टीवी की शुरुआत हो जाएगी। यह कदम विश्वस्तरीय टीवी प्रसारण को आपके द्वार पर ले आएगा। क्या है यह डिजिटल टीवी तकनीक और यह कितनी कारगर होगी, बता रहे हैं कुलदीप शर्मा

देश में टेलीविजन प्रसारण सेवा में एक और क्रांतिकारी अध्याय जुड़ने जा रहा है। 30 जून 2012 के दिन देश के चार प्रमुख महानगर दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई में डिजिटल टीवी प्रसारण शुरू हो जाएगा। अगले दो वर्षो में यह सेवा पूरे देश में पूर्ण हो जाएगी। तब बेहतर पिक्चर, कर्णप्रिय आवाज लिए मनचाहे चैनल आपके टीवी सेट पर होंगे। यही नहीं, फोन और अन्य संचार सेवाओं की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व बदलाव होगा।

खाने के नाम पर कुछ भी खा लेना एक बात है तो संतुलित भोजन करना दूसरी बात। ठीक इसी प्रकार अपने टीवी सेट पर कैसी भी ऑडियो-वीडियो क्वालिटी लिए कार्यक्रम देखना ‘बस देख भर लेना है’ तो बेहतरीन गुणवत्ता के ऑडियो-वीडियो के साथ कार्यक्रम देखने का मजा अलग ही है। अब अपने देश में यह कल्पना साकार होगी। जल्द ही पूरे देश को एचडी टेलीविजन ब्रॉडकास्ट का तोहफा मिलने वाला है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डिजिटल प्रसारण से फोन और अन्य संचार माध्यमों में भी गुणवत्ता लिए चौंकाते फीचर आ जुड़ेंगे।

जब मनोरंजन आकाश से उतरा
वर्ष 2000 के जाते-जाते नवम्बर माह में देश में तीसरे दौर के मनोरंजन की खामियों से निजात दिलाता चौथे दौर का मनोरंजन-डीटीएच यानी डायरेक्ट टू होम आया था। केबल ऑपरेटर का बिचौलियापन हटा कर उपग्रह से सीधा प्रसारण आपके आंगन में आ उतरा था। डीटीएच के लिए भारत की धरती से ‘अर्थ स्टेशन’ जरूरी था, तभी इसके अपलिंक पर आवश्यकतानुसार नियंत्रण रखा जा सकता था। यह सेवा भी कई रुकावटों के बाद आई थी। असल में ‘रोडियो, टेलीविजन और वीडियो कैसेट्स रिकॉर्डर तथा टेलीग्राफ एक्ट 1985’ एवं वायरलैस टेलीग्राफी के तहत इसकी शुरुआत पर रोक लगा दी गई थी। खैर बाद में संसद में बिल आया और डीटीएच का दरवाजा खुला।

प्रसार की आज तक की स्थिति पर गौर किया जाए तो घरों में यह दो रूप में है। डिजिटल है तो केबल ऑपरेटर की मर्जी पर भी है। डिजिटल का सही रूप समझने से पहले केबल पद्धति पर थोड़ा गौर करना होगा। केबल ऑपरेटर ने प्रत्येक उपग्रह यानी सेटेलाइट के लिए एक डिश का प्रयोग किया और हर डिश को आपस में जोड़ कर मिक्सर में फिट कर दिया। इस तरह मिक्सर के जरिए सारे डिश एक जगह गड्ड-मड्ड हो गए और सभी सेटेलाइट चैनल एक जगह हो गए। अब इन सबको टीवी तक पहुंचाने के लिए तारों की यात्रा शुरू हुई, जो घर-घर में आ जुड़ी। इन उपग्रहों में सी-बैंड के ट्रांसपोंडर लगे होते हैं। इसी की बदौलत उपभोक्ता यानी हम-आप घर बैठे दुनिया भर के चैनल देखते हैं। मगर हर चैनल जरूरी नहीं कि स्पष्ट आए, कुछ की पिक्चर साफ नहीं होगी तो कुछ की आवाज।

उधर डीटीएच में आपको केबल टीवी की तरह कई डिश एंटीना नहीं लेने होते और न ही आप ऑपरेटर पर आश्रित होते हैं। केबल टीवी में प्रयुक्त सी-बैंड की चैनल धारक क्षमता सीमित थी, मगर इस डिश की धारक क्षमता अपार है। इसमें सी-बैंड के स्थान पर केयू-बैंड का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा यह केबल टीवी का सुधरा स्वरूप है। इसमें डिजिटल तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिससे 36 मेगाहट्र्ज फ्रीक्वेंसी का ट्रांसपोंडर इसका आधार बनता है। ट्रांसपोंडर द्वारा ही ट्रांसमिट सिग्नल को इंटीग्रेटेड रिसीव एंड डीकोड यानी आईआरडी बक्से की सहायता से रिसीव किया जाता है।

आधी सदी से पूर्व 15 सितंबर 1959 को पहली बार भारत ने संचार प्रौद्योगिकी में एक लंबी छलांग लगाई थी और दिल्ली में पहला एनालॉग टीवी सिग्नल आया था। आज भी केबल ऑपरेटर उसी एनालॉग ब्रॉडकास्ट प्रौद्योगिकी का दामन थामे हुए हैं। चूंकि यह उतनी बेहतर नहीं है, अत: केबल से प्राप्त प्रसारण अच्छा नहीं होता।

गुणवत्ता बदलेगी, प्रौद्योगिकी सुधरेगी
देश की वर्तमान टीवी व्यवस्था का आकलन किया जाए तो आज भी 9.4 करोड़ केबल टीवी घरों में अपनी जड़ें जमाए हुए हैं, जिसमें से 8.5 करोड़ अब तक एनालॉग कनैक्शन में ही बंधे हैं, मगर जब प्रसारण की सही गुणवत्ता सामने आएगी तो सबको हैरान करेगी। इस दिशा में सेटअप बॉक्स यानी एस टीवी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह जादुई डिब्बा बिना गुणवत्ता से समझौता किए अधिकाधिक चैनल्स समाहित करेगा और उपभोक्ता को हाई डेफीनेशन चैनल्स दिखाएगा।

डिजिटल टीवी प्रसारण और रिसेप्शन द्वारा हाई स्पीड इंटरनेट एक्सेस संभव हो पाएगा। यह सुधरी तकनीक टीवी प्रसारण की दुनिया में तहलका मचा देगी। टीवी को ठीक कंप्यूटर की तरह देख पाना संभव होगा, जिसके लिए नए डिजिटल एस टीवी की जरूरत होगी। पहले चरण में ही एनालॉग एस टीवी की जगह 70 लाख डिजिटल एस टीवी  स्थापित करने होंगे, जिसकी समय सीमा 30 जून 2012 निर्धारित की गई है। यह पहला चरण दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई में पूर्ण होगा, जबकि मार्च 2013 तक देश के 38 और बड़े शहरों की जनसंख्या की मांग की पूर्ति के लिए 2.2 करोड़ डिजिटल एस टीवी की सहायता से घर-घर में डिजिटल टीवी प्रसारण संपन्न होगा।

प्रशिक्षित होंगे केबल आपरेटर्स
कोई भी नई तकनीक सहज नहीं होती। डिजिटल टीवी ब्रॉडकास्ट के साथ भी ऐसा ही कुछ है। इस दिशा में सरकार द्वारा विशेष कदम उठाए जाने की घोषणा की गई है, ताकि निर्धारित समय सीमा पर कार्य संपन्न हो सकें। इसके लिए सरकार की इंजीनियरिंग बॉडी द्वारा प्रौद्योगिकी मापदंड निर्धारित किए जा रहे हैं। एस टीवी का प्रयोग विस्तृत पैमाने पर करने के लिए केबल टीवी कंपनियों द्वारा डिजिटल टीवी डिस्ट्रिब्यूशन टेक्नोलॉजी के विभिन्न मुद्दों पर टीवी ऑपरेटर्स को प्रशिक्षित भी किया जाएगा। अत: स्पष्ट है कि देशभर के टीवी उपभोक्ताओं को पुरानी लचर एनालॉग प्रसारण प्रौद्योगिकी से मुक्ति दिलाकर प्रभावी तथा उच्चकोटि की डिजिटल टेक्नोलॉजी को स्थापित किया जाएगा।

उपभोक्ता पर खर्च बढ़ेगा
इसमें दो राय नहीं कि डिजिटल एस टीवी से प्रभावी और स्पष्ट दृश्य देखने को मिलेंगे, वहीं बेहतर गुणवत्ता लिए चैनल्स की संख्या बढ़ेगी। आप अपने पसंदीदा चैनल्स छांट पाएंगे। अपनी पसंद की फिल्म ऑर्डर कीजिए, भाषा चुनिए, विज्ञापनों से मुक्ति पाइए। इतने कुछ के लिए, आंखों की बेहतरी के लिए, मन-मस्तिष्क की शांति के लिए कुछ धनराशि अधिक तो देनी ही होगी। नए डिजिटल एस टीवी की कीमत 1500 रुपए होगी, जो नए डीटीएच कनैक्शन के समान है। यही नहीं, केबल ऑपरेटर्स को भी चैनल्स के लिए अतिरिक्त राशि देनी होगी।

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