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मंगल से टपके उल्का पिंड

वैज्ञानिक खोज स्पष्ट करती है कि हमारी धरती समय-समय पर उल्का पिंडों का शिकार होती रही है। इस दिशा में अमेरिकी संस्था नासा द्वारा महत्वपूर्ण शोध कार्य किये गये हैं। हालिया वैज्ञानिक रिपोर्ट बताती है कि गत वर्ष मोरक्को में गिरा मार्टिन उल्कापिंड लाल ग्रह यानी मंगल से आया है। रिपोर्ट के अनुसार यह घटना हर पचास वर्ष के अंतराल पर होती है।

प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार इस प्रकार की पहली घटना वर्ष 1815 में फ्रांस में घटी थी, उसके बाद दूसरी घटना 1865 में भारत में, तीसरी वर्ष 1911 में मिस्र में तो चौथी बार 1962 में नाइजीरिया में देखी गई थी। वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टोली द्वारा इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि वर्ष 2011 की जुलाई में टपके उल्कापिंड भी सौरमंडल के ही हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि हजारों साल पहले मंगल पर कोई टक्कर हुई, जिससे वहां की चट्टानों के टुकड़े अंतरिक्ष में पसर गए और अब वही धरती के वातावरण में प्रवेश कर उल्कापिंडों की फुहार कर रहे हैं और गनीमत है कि उनका आकार घर्षण से छोटा हो गया था।

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  • Web Title:मंगल से टपके उल्का पिंड