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सड़कों पर आवागमन हो, हादसे नहीं

यह माना जाता है कि विकास हमेशा सड़कों से गुजरकर ही आगे बढ़ता है। समस्या तब आती है, जब अर्थव्यवस्था के विकास के साथ सड़कें कदमताल नहीं कर पातीं। फिलहाल हम इसी दौर से गुजर रहे हैं। तरक्की के साथ ही सड़कों पर जितनी बड़ी संख्या में वाहन आ गए हैं, उस अनुपात में सड़कें नहीं बनी हैं। सड़कों पर वाहनों की भरमार दुर्घटनाओं का कारण बनती है। देश में प्रतिवर्ष 80 हजार से अधिक मौतें सड़क दुर्घटनाओं में होती हैं और 3.5 लाख लोग घायल हो जाते हैं।

सड़क हादसों के शिकार होने वालों की यह तादाद देश में किसी भी महामारी में मरने वालों की संख्या से कहीं ज्यादा है। हालांकि भारत में वाहनों की संख्या पूरी दुनिया का महज एक प्रतिशत है, लेकिन यहां होने वाली सड़क दुर्घटनाएं पूरी दुनिया का तकरीबन दस प्रतिशत हैं। भारत में  हर साल प्रति एक हजार वाहनों पर 35 दुर्घटनाएं घटती हैं, जबकि विकसित देशों में इनकी संख्या महज चार से दस प्रतिशत है।

आमतौर पर यह माना जाता है कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं सड़कों या ट्रैफिक नियमन का पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण घटती हैं। लेकिन यह पूरा सच नहीं है, हालांकि यह भी एक वजह है। कई बार अच्छी और चौड़ी सड़कों पर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ भी जाती है। इसका एक उदाहरण है मुंबई- पुणे एक्सप्रेस-वे। इस मार्ग की गिनती देश की सबसे अच्छी सड़कों में होती है, लेकिन वहां दुर्घटनाएं भी बहुत ज्यादा घटती हैं। खुली और चौड़ी सड़क देखकर लोग वहां तेजी से गाड़ियां भगाने लगते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं पर हुए शोध में पाया गया है कि भारत में 75 प्रतिशत दुर्घटनाएं मानवीय कारणों या यातायात नियमों की गैर जानकारी के कारण घटती हैं। यह समस्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2001 में जिन जिलों में दुर्घटना में पांच व्यक्ति मरते थे, 2005 में ही उन्हीं जिलों में दुर्घटना में मरने वाले लोगों की संख्या 250 पहुंच गई।

विश्व बैंक का कहना है कि भारत में इस समस्या का समाधान जागरूकता बढ़ाकर ही किया जा सकता है। यहां जागरूकता का अर्थ सिर्फ वाहन चालकों या आम नागरिकों को ही जागरूक बनाना नहीं है। विश्व बैंक का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से उन ‘टाउन प्लैनर्स’ और इंजीनियरों को भी जागरूक बनाना जरूरी है, जो सड़कों का निर्माण करते हैं। विश्व बैंक ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए इस पर एक परियोजना भी तैयार की है। इसी तरह सड़कों पर गति को नियंत्रित करने की पक्की व्यवस्था का न होना भी सड़क हादसों का कारण बनता है।

इन सबसे बड़ी समस्या शायद यह है कि हमारे नीति नियामक अभी सड़क हादसों को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं हुए हैं। लेकिन देर-सबेर इस समस्या को प्राथमिकता सूची में लाना ही होगा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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