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खून से सना सीरिया

सीरिया में सरकार के विरोध में जो संघर्ष शुरू हुआ था, वह गृह युद्ध जैसी हालत में बदल गया है। हजारों की मौत, लेकिन हिंसा खत्म होने का दूर-दूर तक निशान नहीं। दमिश्क में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ छात्रों की रैली से विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई, तो असद के भाषण का मजमून कुछ ऐसा था, ‘आतंकियों के साथ कोई समझौता नहीं।

हथियार लिए ये अफरातफरी फैला रहे हैं। इन लोगों ने दूसरे देशों के साथ मिलकर हमारे खिलाफ साजिश की है।’ लेकिन असद और उनकी सरकार के लिए आतंकवादी वे स्कूली बच्चे हैं, जो दीवारों पर आजादी के नारे लिखते हैं। इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। असद के खिलाफ संघर्ष तेज होने का कारण था कि माता-पिता अपने बच्चों की रिहाई की मांग कर रहे थे। ‘असद को फांसी’ के नारों के साथ देश भर में आंदोलन तेज हुआ और दमन चक्र भी। निहत्थों पर गोली, हर किसी की गिरफ्तारी और अत्याचार।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास असद के खिलाफ कुछ नहीं है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा प्रस्ताव पर चीन और रूस ने दोनों बार वीटो कर दिया। उनका आश्वासन सीरिया के साथ है, वे उस देश में हथियार बेच रहे हैं। रूस और चीन लीबिया मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई से भी नाराज थे। बहरहाल, सीरियाई लोगों का भविष्य अनिश्चित है। पश्चिमी देशों के उपाय, अरब लीग का मरहम, कुछ भी काम नहीं आ रहा है। मुल्क में एक ऐसा विपक्ष है, जो हत्यारी सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं करना चाहता। ऐसी स्थिति में बिना तकलीफ के हल संभव नहीं है।
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