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पुत्रियों ने दी पिता की चिता को मुखाग्नि

हर पिता का सपना होता है कि उसकी अर्थी को उसका पुत्र ही कंधा दे और वही उसे मुखाग्नि दे। लेकिन नगर के मौहल्ला मिश्रना में कैंसर से पीड़ित एक प्रौढ़ की मौत को जब उसकी पुत्रियों ने कंधा दिया तो जिसने भी देखा वह भावुक हो गया। पुरुष विहीन परिवार की इन युवतियों को ढांढस बधाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

मिश्रना निवासी 45 वर्षीय आनन्द श्रीवास्तव को एक वर्ष से कैंसर की शिकायत थी। आनन्द का एसएन मेडीकल कालेज आगरा में उपचार चल रहा था। बीती रात आनन्द की मौत हो गयी। आनन्द के घर में कोई पुरुष नहीं है। उसके न तो कोई भाई है और न ही कोई पुत्र। आनन्द की मौत के बाद आनन्द के परिवार में कोहराम मचा हुआ था। उस समय हालात और बिगड़ गये जब आनन्द की अर्थी को उसकी जवान पुत्रियों ने कंधा दिया। आनन्द की 17 वर्षीय पुत्री आरती तथा 14 वर्षीय पुत्री गौरी नगर के राजकीय बालिका इण्टर कालेज की छात्रएं हैं। आनन्द की इच्छा थी कि उसकी मौत पर उसकी पुत्रियां ही उसे कंधा लगायें।

पिता की इच्छानुसर पुत्रियों ने ही पिता को कंधा लगाया। आनन्द की शव यात्रा में शामिल लोग उस समय और भावुक हो गये जब दोनों बहनों ने पिता की चिता को विलकते हुए श्वर में मुखाग्नि दी। जनपद के इतिहार में यह उन गिनी चुनी घटनाओं में से एक जब किसी लड़की ने अपने पिता को मुखाग्नि दी हो। जानकार लोगों का मानना है कि परंपरा के अनुसार किसी पुरुष को ही शव को मुखाग्नि देनी चाहिए थी। लेकिन अब समाज में परिवर्तन के साथ लड़का और लड़की में कोई भेद नहीं रहा है। ऐसे में लड़कियों ने पिता के शव को मुखाग्नि देकर साहस का परिचय दिया है।

 कैंसर यूनिट सावित हो रही है सफेद हाथी
जनपद में कैंसर पीड़ितों के उपचार के लिए जिला अस्पताल में सपा सरकार में करोड़ो रूपए की कैंसर यूनिट का निर्माण कराया गया। लेकिन डॉक्टर की तैनाती न किये जाने से जनपद वासियों के लिए सफेद हाथी सावित हो रही है। लोगों का मानना है कि यदि जनपद की कैंसर यूनिट पर उपचार मिल रहा होता तो शायद आनन्द की जान बच जती। आनन्द की चिता के दौरान लोगों के यही विचार थे।

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