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उत्तराखंड संकट: बहुगुणा के लिए कठिन है डगर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अगर सदन में अपना बहुमत भी साबित कर देते हैं तो उनके लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। यह मानना है कि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का।

कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी का विश्वास जीतने के बाद बहुगुणा 13 मार्च को मुख्यमंत्री बने और बागी धड़े को एकजुट करने में उन्हें काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि बहुगुणा का पहला काम सभी धड़ों को साथ लेकर अपने मंत्रालय का विस्तार करना होगा जिसमें हरीश रावत के धड़े को शामिल करने के साथ ही उनकी मांगों को मानना होगा।

कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले तीन निर्दलीय, बसपा के तीन विधायक और उत्तराखंड क्रांति दल का एक विधायक भी समर्थन के लिए बहुगुणा से कुछ कीमत मांग रहे हैं। बहुगुणा के नजदीकी एक कांग्रेसी नेता ने कहा कि चूंकि हम हरीश रावत एवं अन्य खेमों पर निर्भर हैं इसलिए हम किसी भी मांग को नहीं नजरअंदाज नहीं कर सकते।

निर्दलीय विधायक और यूकेडी के एकमात्र विधायक प्रीतम सिंह पवार ने बहुगुणा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि एकमात्र राज्यसभा सीट केवल पहाड़ के किसी व्यक्ति को दी जानी चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का छह वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद सीट खाली है। यहां से चतुर्वेदी के राज्यसभा में चुने जाने के लिए कांग्रेस की काफी आलोचना होती रही है क्योंकि उन्हें बाहरी माना जाता है।

सरकार का समर्थन करने वाले गैर भाजपा के सभी सात विधायक भी कैबिनेट में शामिल करने और महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग कर रहे हैं।

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