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‘मैं हर किसी को खुश नहीं कर सकता’

सौवें शतक का आपके लिए क्या मायने है?
हर ओर से इस शतक का दबाव था। मैंने वास्तव में इसके लिए कड़ी मेहनत की। इस शतक ने सिखाया कि किसी बात को आसान नहीं समझना चाहिए। इसने मेरे धैर्य, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की परीक्षा ली। मेरे लिए कई कुंठित करने वाले क्षण भी रहे लेकिन परिवार और दोस्तों ने मुझे लगातार प्रेरणा दी।

अब आपका अगला लक्ष्य क्या है?
(हंसते हुए) अभी तो मैं सौवें शतक को पूरा महसूस भी नहीं कर पाया हूं, इसे तो गुजरने दीजिए। अगले 24 घंटों में हमारा अहम मुकाबला पाकिस्तान से है। अगर हमें एशिया कप में बने रहना है तो उन्हें हराने के लिए बहुत अच्छा खेलना होगा।

आप आलोचना को किस रूप में लेते हैं?
देश के लिए खेलना मेरे लिए महानतम प्रेरणा है। मैदान पर मैं सौ फीसदी प्रयास करता हूं। ऐसे बहुत लोग हैं जो चाहते हैं कि मैं अच्छा प्रदर्शन करूं। उनमें से कई के पास मेरा फोन नंबर है। वे अपनी बात मुझ तक पहुंचाते हैं। मैं हर व्यक्ति को नहीं बता सकता कि मैं मैदान पर क्या कर रहा था? आप हर बार सफल नहीं हो सकते और न ही हर किसी को खुश कर सकते हैं।

किसी खास शतक और इसकी खास वजह बताएंगे?
यूं तो मेरे लिए हर शतक खास है। चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ लगाया शतक बहुत संतुष्ट करने वाला था। इसे मैंने मुंबई में आतंकवादी हमले के बाद लगाया था। पूरा देश दुख में डूबा था। लोगों ने अपने करीबी गंवाए थे। हम चाहते थे कि अपने प्रदर्शन से देशवासियों को यादगार तोहफा दें। मैं इंग्लैंड टीम और उनके बोर्ड का धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने बहादुरी का परिचय दिया और उनकी टीम दौरे पर आई।

क्रीज पर पहुंचने के बाद सबसे पहले क्या करते हैं?
मैं सबसे पहले देखता हूं कि फील्डर कहां खड़े हैं। यह ऐसा युग है जब हर कोई अपने विपक्षी और उसकी रणनीति जानता है। आपको दिमाग में हर चीज रखनी पड़ती है- गेंदबाज, फील्डरों की जमावट, रणनीति, विपक्षी और अपनी टीम। इसके साथ पिच के व्यवहार को भी दिमाग में रखना पड़ता है।

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