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करारी शिकस्त के बाद अब मंथन में जुटी भाजपा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता इस बात को लेकर चिंतन-मनन में डूबे हुए हैं कि पार्टी से चूक कहां हो गई और तमाम रणनीतिकारों के रहते हुए भी पार्टी को इतनी फजीहत क्यों झेलनी पड़ी।

हार के कारणों पर चर्चा के लिए पिछले दिनों भाजपा मुख्यालय में पदाधिकारियों की बैठक भी हुई जिसमें पार्टी को सही रास्ते पर लाने और अंदरुनी भीतरघात का पता लगाने पर माथापच्ची की गई लेकिन अंत तक बैठक का नतीजा नहीं निकल पाया।

अब भाजपा के बड़े नेताओं का दावा है कि 31 मार्च तक हार के कारणों का पता लगा लिया जाएगा और इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा। भाजपा के एक नेता ने बताया कि चिंतन बैठक से कुछ होने वाला नहीं है। जब अपने ही लोग पार्टी की जड़ें खोदने में जुटे हैं तो और क्या कहा जाए।

भाजपा नेता ने सीधे तौर पर तो वरुण गांधी और आदित्यनाथ का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि गोरखपुर और पीलीभीत में सामानांतर संगठन चलाने वालों ने भी 'पार्टी की जड़ों में कम मट्ठा नहीं डाला है'। भाजपा नेता ने कहा कि कुशवाहा प्रकरण से भाजपा को बहुत अधिक नुकसान हुआ। पार्टी की चिंतन बैठक में जब यह मसला उठाया गया तो बड़े नेताओं का कहना था कि अब बीती बातों को याद करने से कोई फायदा नहीं, आगे की रणनीति पर विचार किया जाना चाहिए।

भाजपा नेता की मानें तो बड़े नेता इन बातों पर पर्दा डालने की कोशिश इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसी बहाने उनकी नाकामी भी सबके सामने आ जाएगी। चुनाव में भीतरघात और खींचतान का पता लगाने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर भी कमेटियों को गठित करने का केवल कोरम ही पूरा किया गया है। इससे कितना लाभ मिलेगा वह तो समय आने के बाद पता चल ही जाएगा।

भाजपा कार्यालय में लोग दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार से कोई सबक नहीं लिया है, इसीलिए विनय कटियार जैसे लोगों को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है जबकि सही मायने में कहें तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की नैया डुबोने के लिए यही लोग जिम्मेदार हैं।

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अभयानंद शुक्ल ने कहा कि भाजपा के नेताओं को चिंतन बैठक की बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। यहां हर कोई भीतरघात का शिकार है और बस मौके की तालाश में है।

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