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विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बाद की घोषणा

नक्सल प्रभावित जिलों के लिए इन्फ्लेमेबल लाइट की आपूर्ति के बदले रिश्वत लेने के मामले की जांच गृह सचिव करेंगे। इस मामले में एक आइपीएस पर लगभग बीस लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है।

मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शनिवार को विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बाद जांच कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गृह सचिव की रिपोर्ट आने के बाद आवश्यकता हुई, तो इसकी किसी एजेंसी से भी जांच कराई जाएगी।

इस मामले को हिन्दुस्तान ने शनिवार को प्रमुखता से छापा था। विधानसभा में यह मामला कांग्रेस विधायक सौरभ नारायण सिंह ने उठाया। हिन्दुस्तान की प्रतियां लहराते हुए विपक्षी विधायकों ने इस मामले को उठाया और जांच की मांग की।

इस दौरान कई विधायक वेल में आ गए। हंगामे के कारण लगभग 15 मिनट तक सदन बाधित रहा। सदन में मौजूद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि सुबह खबर पढ़ने के बाद उन्होंने गृह सचिव को जांच का आदेश दे दिया है। झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

दागियों को सम्मानित करने का मामला उठा
इस बीच विधायक गीता कोड़ा ने नक्सली के नाम पर निदरेष आदिवासियों को मारने वाले सीआरपीएफ के अधिकारियों एवं जवानों को पुरस्कृत किए जाने का मामला भी उठाया। सीआरपीएफ के आइजी ने यह पुरस्कार दिया है। यह खबर भी हिन्दुस्तान के 17 मार्च के अंक में प्रकाशित की गई है।

क्या है मामला
इन्फ्लैमबल लाइट की आपूर्ति का आर्डर प्राप्त करने के लिए कंपनी को 20 लाख का रिश्वत देना पड़ा है। दो करोड़ के काम के बदले रिश्वत की राशि एक आइपीएस अधिकारी ने वसूली है। पिछले गुरुवार की रात उड़ीसा के बालासोर के दो युवक मनोज और अंकित रांची आए थे। दोनों सीसीएल के गेस्ट हाउस में रुके थे।

झारखंड पुलिस को उग्रवाद ग्रस्त जिलों के लिए 180 इन्फ्लेमेबल लाइट खरीदनी है, जिस पर चार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। गुड़गांव की एक कंपनी को ठेका दिया गया है। उससे रिश्वत के रूप में 40 लाख की मांग की गई थी। हालांकि बाद में बात 20 लाख रुपए पर तय हो गई।

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