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रथ का मेला- वृन्दावन बना पुरी

 वृन्दावन। हिन्दुस्तान संवाद

विशाल रथ पर विराजमान हो भगवान गोदारंगमन्नार ने भक्तों को दर्शन दिए। 60 फु ट ऊंचे दक्षिण भारतीय शैली से बने रथ को आस्था और विश्वास के साथ रस्सों से खींचकर भक्तों ने आगे बढ़ाया। रथ यात्राा के साथ चल रहे कई बैंडबाजों की धुन पर श्रद्धालु झूमे। रथ मेले की इस भव्यता से वृन्दावन पुरी में तब्दील हो गया।

देश के सुप्रसिद्ध रंग मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव के अवसर पर शनिवार को प्रात: भगवान गोदा रंगमन्नार का दक्षिण भारत के दर्जनों आचार्यो ने वेद मंत्रोच्चारों के मध्य अभिषेक कर उन्हें विशाल प्राचीन रथ पर विराजमान किया। उनकी एक झलक पाने के लिये हजारों की संख्या में मंदिर प्रांगण में जुटे भक्तों में होड़ सी मच गई। चंदन लकड़ी से बने रथ पर भगवान के द्वारपाल जय-विजय, छह सिंह शार्दूल एवं अनेकों देवता प्रभु सेवा में रत दिखे। भगवान के चार घोड़ों वाले रथ से बंधे बड़े-बड़े रस्से को खीचकर हजारों श्रद्धालु उसे तिल-तिल आगे बढ़ाते। प्रभु की जय-जयकार के बीच सुसज्जित ऊंट, घोड़े रथ के आगे-आगे चल रहे थे। रथ रंगजी के बड़े बगीचे पर पहुंचा। काफी देर विश्राम करने के बाद भगवान को पुन: मंदिर लाया गया। रंगजी मंदिर से लेकर चुंगी चौराहा और बड़े बगीचा तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

यह यात्रा पुन: बड़े बगीचा से शाम को मंदिर पहुंची। इस यात्राा के दर्शन के लिए स्थानीय भक्तों के साथ हजारों की सख्यां में दक्षिण भारतीय एवं विदेशी भक्त आए। इस पौराणिक महत्व की रथ यात्रा के दर्शन से पुरी में निकलने वाले रथ का भक्तों को आभास हो आया। इस मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के लिए नगर के समाजसेवी और भक्तों ने जगह-जगह मीठे शीतल जल की प्याऊ लगाई।ं

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