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ठाकुर को चुनार भेजने से बचाने की कोशिश भी हुई

विशेष संवाददाता राज्य मुख्यालय

इसे सियासी मजबूरी कहें, कार्यकर्ताओं का मान-सम्मान या फिर पुलिस महकमे के लिए सख्ती भरा संदेश कि लखनऊ के डीआईजी डी.के.ठाकुर को चुनार न भेजने की तमाम मान-मन्नौवल को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दरकिनार कर दिया। डीजीपी मुख्यालय के अधिकारी सत्ताशीर्ष पर बैठे अधिकारियों को समझाने की कोशिश करते रहे कि ध्रुव कुमार ठाकुर ऐसे अफसर नहीं हैं जिन्हें चुनार भेजकर सजा देने का संदेश दिया जाए, लेकिन सपा कार्यकर्ताओं पर सख्ती कर रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनके जख्मों को तरजीह दी।डी.के.ठाकुर की लखनऊ से अन्यत्र रवानगी को लेकर कयास तो समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद से ही लगाए जाने लगे थे, लेकिन जब उन्हें चुनार भेजने का प्रस्ताव मांगा गया तो डीजीपी मुख्यालय के कुछ बड़े अधिकारी सक्रिय हुए। डी.के.ठाकुर की साफ छवि की दुहाई दी गई। तर्क दिया गया कि उनकी सत्यनिष्ठा के चलते ही उन्हें सीबीआई में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मिल सकी थी। इस पर शासन ने डीजीपी मुख्यालय से शनिवार की सुबह नया प्रस्ताव मांगा। बड़े अधिकारी अंत तक कोशिश करते रहे कि नए प्रस्ताव को ही मंजूरी मिल जाए, लेकिन अंतत: वह प्रस्ताव मंजूर नहीं किया गया और वे आरटीसी चुनार ही भेज दिए गए।

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