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साक्षरता दर तो बढ़ी, लेकिन सजग नागरिक नहीं

वाराणसी कार्यालय संवाददाता

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने बीएचयू के 94वें दीक्षांत समारोह के बाद अपने संबोधन में समाज को आईना दिखाया। उन्होंने विद्वतजन को समाज के प्रति दायित्वों के निर्वाह की नसीहत दी। दहेज और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, हमने पिछले 60 सालों में साक्षरता दर तो बढ़ा ली है, लेकिन सजग नागरिकों की संख्या में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं कर सके।फूल-पत्तियों से सजाए गए भव्य मंच से मुख्य अतिथि मीरा कुमार ने कई सामाजिक मुद्दों और विसंगतियों को प्रबुद्धजनों के बीच चर्चा के लिए उठा दिया।

चाहे समाज में जातिगत व्यवस्था का तेजी से पनपना हो या फिर महिलाओं की घटती संख्या। दहेज प्रथा हो या अध्ययन-अध्यापन का तरीका। सभी पर उन्होंने काफी सहज अंदाज में प्रहार किया। मृदुभाषी लोकसभा अध्यक्ष ने यह अहम बात कही कि समाज में दो अस्तित्व एक साथ नहीं रह सकते। उनका इशारा लोकतंत्र और जातिगत व्यवस्था की ओर था। उन्होंने सवाल किया कि जातिगत व्यवस्था को खत्म करने के लिए अगर विद्वतजनों से अपेक्षा न रखूं तो और कौन यह काम कर सकेगा।..आरती में सुर नहीं, शोर हैगंगा की मौजूदा स्थिति पर मीरा कुमार अपनी पीड़ा रोक नहीं पाईं। उन्होंने इस पर अपनी एक कविता ‘शब्द बेमानी हैं, आरती में सुर नहीं, शोर है, पतित-पावनी को घेरे मलिनता घोर है, समेटे कलुष हमारा तुम्हारा, बहुत उदास बहती है गंगा।’ उनकी यह कविता उस व्यवस्था पर तीखा प्रहार थी, जो पिछले ढाई दशक से गंगा की निर्मलता और अविरल धारा को वापस लाने में जुटी है। बात-बात में उन्होंने यह भी कह दिया कि गंगा काशी और इस विश्वविद्यालय की पहचान है।

इसके बावजूद यहां गंगा की दुर्दशा देखकर काफी दु:ख होता है।मेडलधारियों में छात्राओं की संख्या ज्यादामीरा कुमार ने इस बात पर काफी प्रसन्नता जताई कि बीएचयू के इस दीक्षांत समारोह में मेडलधारियों में छात्राओं की संख्या ज्यादा है। 27 मेडलधारियों में से 15 छात्राएं हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने मेडलधारी विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की कि वे यहां से हासिल शिक्षा का उपयोग समाज के कल्याण और विकास के लिए करेंगे।24 बार बजीं तालियांलगभग 25 मिनट के मीरा कुमार के भाषण के दौरान श्रोताओं ने 24 बार तालियां बजाईं। जब उन्होंने यह कहा, कि मेरे पिता स्व. बाबू जगजीवन राम को महामना मदन मोहन मालवीय ने उनकी मेधा पहचान कर बीएचयू में उच्चतर शिक्षा के लिए आमंत्रित किया था, तब सबसे देर तक तालियां बजती रहीं।

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