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इविवि में इस वर्ष भी मुश्किल है दीक्षांत समारोह

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इस वर्ष भी दीक्षांत समारोह हो पाना मुश्किल लग रहा है। दिसंबर 2011 में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में तय हुआ था कि दीक्षांत समारोह फरवरी में होगा। इसमें इविवि की विजिटर एवं राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी पाटिल को बुलाने तक की बात हुई थी लेकिन अभी इसकी कोई सुगबुगाहट ही नहीं है। अब विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं।

राज्यपाल एवं राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति बीएल जोशी के आदेश के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में नियमित रूप से दीक्षांत समारोह होने लगे हैं। यहां तक की राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय भी नियमित दीक्षांत समारोह का आयोजन कर रहा है। एमएनएनआईटी और ट्रिपलआईटी में भी हर साल समारोह आयोजित कर छात्रों को सम्मानजनक तरीके से डिग्रियां दी जा रही हैं। पूरब का आक्सफोर्ड कहे जाने वाले इविवि के छात्रों को यह सुअवसर पिछले कई छह वर्षो से नहीं मिल रहा है। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि पूर्व और वर्तमान कुलपति तथा यहां के प्रशासनिक पदों पर तैनात अफसरों की उदासीनता है। छात्र, शिक्षक और सेवानिवृत्त शिक्षक भी लगातार दीक्षांत समारोह आयोजित करने की मांग कर रहे हैं।

इविवि में अंतिम दीक्षांत समारोह 2005 में हुआ था, तब कुलपति प्रो. जीके मेहता था। केंद्रीय दर्जा प्राप्त हुए छह वर्ष गुजर गए पर इन छह वर्षो में एक भी समारोह नहीं हुआ। राज्यपाल बीएल जोशी, जो इविवि के चीफ रेक्टर भी हैं, के निर्देश पर राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह शैक्षिक कैलेंडर में शामिल कर लिया गया है। राज्यपाल दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि जाने-माने शिक्षाविदों, न्यायविदें और वैज्ञानिकों को आमंत्रित कर उनसे दीक्षांत भाषण भी करवा रहे हैं। राज्यपाल का मानना है कि इस तरह के समारोह से छात्रों में आत्म गौरव का भाव जागृत होता है।


‘दीक्षांत समारोह किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान का अनिवार्य कार्यक्रम होता है। इससे छात्रों को दीक्षांत संदेश सुनने का सुअवसर तो प्राप्त होता ही है उनके भीतर गौरव का भाव भी जगता है। पूर्व में इविवि में दीक्षांत समारोह आयोजित होते भी थे पर इधर छह वर्षो से समारोह आयोजित नहीं हुए, यह दुखद है।’
-प्रो. जीसी त्रिपाठी, अध्यक्ष, इविवि शिक्षक संघ

‘मैं और मेरे साथी छात्र नेता लंबे समय से दीक्षांत समारोह की मांग कर रहे हैं। पूर्व कुलपति प्रो. आरजी हर्षे को इससे कोई मतलब ही नहीं था। वर्तमान कुलपति से भी दीक्षांत समारोह की मांग प्रमुखता से की गई थी। उन्होंने पहल भी की लेकिन अब तक समारोह नहीं करवा सके।’
-अभिषेक यादव, छात्र नेता

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