DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्टेट बैंक में फर्जी लोन रैकेट का भंडाफोड़

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में फर्जी चेकों के जरिए खाते से सवा करोड़ रुपए निकल जाने का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि आंचलिक शाखा में लोन दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले रैकेट का भंडाफोड़ हो गया। यह गिरोह दजर्नों लोगों से लाखों रुपए ऐंठ चुका है। इस फर्जीवाड़े में एसबीआई के दो कर्मचारियों के नाम भी सामने आए हैं। पूरे मामले की छानबीन चल रही है। इस खुलासे के बाद एसबीआई में हड़कंप मचा हुआ है।

इस फर्जीवाड़े का पता उस समय चला, जब शनिवार को ठगी का शिकार शाहिद खान और शबनम खान अपने लोन की जानकारी करने एसबीआई अधिकारी के पास पहुंचे। लोन स्वीकृत पत्र दिखाने पर पता चला कि वह फर्जी है और ऐसा कोई लोन बैंक ने उनके नाम से स्वीकृत नहीं किया है। यह पता चलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। तभी उन्हें बैंक परिसर में मयंक निगम नाम का वही दलाल दिखा, जिसे उन्होंने लोन पास कराने के लिए 80 हजार रुपए दिए थे। शोर मचाने पर सिक्योरिटी अफसरों ने उसे दबोच लिया। गिरफ्त में आने के बाद उसने मुंह खोला तो अधिकारी हैरत में पड़ गए। लोन के फर्जी कागजात तैयार करने में माहिर रैकेट के मास्टरमाइंड प्राइवेट बैंकों में काम कर चुके हैं।

गोविन्द नगर निवासी मयंक आईसीआईसीआई बैंक के पर्सनल लोन विभाग का कर्मचारी रह चुका है। जबकि आजादनगर निवासी उसका साथी अजय ठकराल एक्सिस बैंक से निकाला जा चुका है। बैंकों की लोन प्रक्रिया से अच्छी तरह वाकिफ होने का फायदा दोनों ने ठगने के लिए उठाया। मनोज सोनकर से 20 लाख रुपए के लोन के एवज में एक लाख, राकेश सिंह के 12 लाख लोन के लिए 60 हजार रुपए और निशांत निगम से 8 लाख के बदले 50 हजार की चपत लगाने के बाद उनके हौसले बढ़ गए।

ठगों के जाल में फंसे शाहिद खान ने बताया कि पैसों की जरूरत थी, इसलिए न्यू गैंजेस बंगला स्थित घर गिरवी रखकर बैंक से लोन लेने का फैसला किया। माल रोड स्थित मुख्य शाखा परिसर में घुसते ही रैकेट के सदस्य मयंक ने घेर लिया और दो हफ्ते में लोन दिलाने का वादा किया। इससे पहले इंश्योरेंस, प्रोसेसिंग फीस और स्टाम्प पेपर खरीदने के बहाने उसने दोनों से 80 हजार रुपए ऐंठे। दो हफ्ते बाद 22 लाख 45 हजार रुपए स्वीकृत होने का पत्र थमा दिया। लोन की रकम न मिलने पर वह सीधे मुख्य शाखा के लोन विभाग पहुंच गए। दस्तावेजों पर एसबीआई हाउसिंग फाइनेंस की मुहर से अफसरों का माथा ठनका क्योंकि इस नाम की कोई कंपनी है ही नहीं। पड़ताल में शाहिद को लुटने का पता चला। एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक पीसी चाचरा ने कहा कि मामला गंभीर है। मामले की जांच चल रही है। फिलहाल बैंक स्टाफ के किसी कर्मचारी का हाथ सामने नहीं आया है।

ठगी के धंधे में बैंककर्मियों की मिलीभगत
पुलिस हिरासत में मयंक ने पहले तो अजय ठकराल को पूरे खेल का कप्तान बताया। लेकिन सख्ती पर टूट गया और उसने सच उगल दिया। उसने बताया कि एसबीआई की मुहरें, पैड और लोन स्वीकृति पत्र तैयार करने में बैंक कर्मचारी रविकांत यादव और मार्केटिंग मैनेजर क्षितिज मोहन अग्रवाल मदद करते थे। फर्जीवाड़े में मदद के एवज में वह लोन का एक फीसदी हिस्सा देता था। रविकांत एसबीआई के लोन विभाग आरएसीपीसी में कार्यरत है।

विभाग के अंदर फांसता था शिकार
एसबीआई में ठगों के इस रैकेट की गहरी पैठ थी। शिकार को भरोसा दिलाने के लिए मयंक मुख्य शाखा, एनआरआई सेल, रिटेल एसेट्स सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (आएसीपीसी) के अंदर मुलाकात करता था। उसकी एक्टिवा स्कूटर से नगर निगम का फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, मुहरें, ढेरों पासबुकें और पत्र बरामद हुए हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्टेट बैंक में फर्जी लोन रैकेट का भंडाफोड़