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पूर्वी उ.प्र. के पांच लाख बुनकरों में मायूसी

पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग पांच लाख बुनकरों को केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट से मायूसी हुई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर, आजमगढ़, मऊ, अम्बेडकरनगर, भदोही, वाराणसी आदि जिलों में बुनकरों की बडी आबादी है और यह बुनकर पावरलूम से कपडा तैयार करते हैं, कालीन बिनते हैं लेकिन पिछले एक दशक से पावरलूम उद्योग की स्थिति बहुत खराब होती जा रही है।
 
बुनकरों को उम्मीद थी कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी द्वारा वाराणसी में किए गए बुनकरों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा और नाबार्ड के द्वारा बुनकरों के कर्जे माफी की घोषणा के बाद उन्हें अपना उद्योग चलाने के लिए कम ब्याज पर लोन और रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही पावरलूम पर तैयार कपडों की बाजार के लिए भी सरकार कोई व्यवस्था करेगी लेकिन इस बजट में ऐसा कुछ नहीं किया गया।
 
बुनकर फ्रन्ट के वरिष्ठ नेता कमरूजमा अन्सारी ने आज बताया कि इस बजट में छोटे और घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए कोई राहत नहीं दी गई है जबकि अल्पसंख्यक समाज के बहुत बडे वर्ग के जीविकोपार्जन का साधन छोटे उद्योग हैं। इसमें पावरलूम, कालीन उद्योग, मुरादाबाद का बर्तन उद्योग, अलीगढ़ का ताला उद्योग और फिरोजाबाद के चूडी उद्योग की स्थिति अच्छी नहीं है। कारखाने बन्द हो रहे हैं और बेरोजगारी बढ़ रही है।
 
उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बुनकरों को नई उम्मीद बनी है कि पिछली मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान सस्ती दरों पर बिजली देने की योजना लागू की गई थी। जिसे मायावती सरकार ने बन्द कर दिया था। राज्य सरकार से बुनकरों व छोटे उद्योगों में लगे लोगों को भी काफी उम्मीद है।

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