DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मनरेगा के तहत करीब 15 प्रतिशत ने ही काम की मांग: मंत्री

बिहार में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत पंजीकृत एक करोड़ 32 लाख 60 हजार 63 जॉब कार्डधारियों में से करीब 15 प्रतिशत ने ही काम की मांग की और उन्हें कार्य उपलब्ध कराया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा ने आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अवनीश कुमार सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में कहा कि जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष जनवरी तक राज्य में पंजीकृत जॉब कार्डधारियों की संख्या एक करोड़ 32 लाख 60 हजार 63 है और इनमें से 19 लाख 75 हजार 532 जॉब कार्डधारियों ने काम की मांग की जिन्हें काम उपलब्ध कराया गया है।
 
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर में 03 तथा शिवहर में 02 जॉब कार्डधारी परिवारों को 15 दिनों के अंदर कार्य उपलब्ध नही कराए जाने के कारण 5220 रूपया बेरोजगारी भो के रूप में दिया गया। मिश्रा ने कहा कि केन्द्र सरकार के मनरेगा कार्यक्रम के लिए उपलब्ध वेबसाइट में आंकड़ों की प्रवृष्टियां अद्दतन नहीं है जिसके कारण काम मांगने वालों को काम नही मिलने का आंकड़ा भिन्न है। उन्होंने कहा कि वेबसाइट की कमियों को दूर करने के लिए केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से अनुरोध किया गया है।

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में सुधार के लिए कई कदम उठाए है। इसके तहत मनरेगा की वार्षिक कार्य योजनाओं की तैयारी में ग्रामीणों की सहभागिता को और अधिक कारगर तथा पारदर्शी बनाने के लिए सितम्बर में वार्ड सभा आयोजित की गई जिसमें योजनाओं को सूचिबद्ध किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके बाद पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों की प्राधिकृत समिति की बैठक में इसे प्रस्ताव के रूप में तैयार कर प्रकाशित किया गया।
 
मिश्रा ने बताया कि दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर जिला प्रशासन के सहयोग से ग्राम सभा आयोजित कर इन प्रस्तावों पर चर्चा हुई। ग्राम सभा से चयनित इन योजनाओं को जिला एवं विभाग के वेबसाइट पर डाला गया। उन्होंने बताया कि मनरेगा योजना के अंतर्गत निधि की समस्याओं को दूर करने के लिए केन्द्रीयकृत निधि प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। जिसके कारण अब कोई पंचायत अथवा अन्य कार्यावयन निकाय मजदूरी के एडवाइस को सीधे बैंक के केन्द्रीय प्रबंधन निकाय को भेजता है और राशि स्वत केन्द्रीय निधि पूल से निकालकर जिला, प्रखंड एवं संबंधित कार्यान्वयन निकाय के खाते से होते हुए मजदूरों के खाते में हस्तानांतरित हो जाती है।
 
मिश्रा ने बताया कि काम की मांग के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है और इसके लिए ग्राम पंचायत के मुख्यालय ग्राम के निकटवर्ती आगनबाड़ी केन्द्र और प्रखंड कार्यालय में एक पेटी रखी गई है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार जॉब कार्ड, काम की मांग या शिकायत से संबंधित आवेदन दे सकते है। इस पेटी को प्रखंड विकास पदाधिकारी की देख रेख में खोला जाता है और सभी आवेदनों को विषय के अनुसार निबंधित किया जाता है।
 
उन्होंने बताया कि इसमें काम की मांग के 15 दिन के अंदर रोजगार उपलब्ध कराने और काम की मांग से संबंधित आवेदन की तिथि समेत प्राप्ति रसीद देने की व्यवस्था की गई है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मनरेगा के तहत 15 प्रतिशत ने ही काम की मांग