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सोनभद्र ने रखा एडवेंचर टूरिज्म में कदम

 गोविन्दपुर (सोनभद्र)। हिन्दुस्तान संवाद

खनिज और वन सम्पदा के लिए देश में विशेष स्थान रखने वाले सोनभद्र जिले ने प्रमुख पर्यटन केन्द्र बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। शुक्रवार से यहां मुरगुड़ी की पहाडिम्यों पर रॉक क्लाइम्बिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें वन विभाग का सहयोग है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह रोमांचक पर्यटन केन्द्र बन जायेगा। मधुवन ग्राम पंचायत के करचा टोला में गठित संयुक्त वन प्रबंधन समिति के 15 सदस्यों को पहले प्रशिक्षण दस्ते में शामिल किया गया है। प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल से तीन विशेषज्ञों की टीम आयी है। समिति के सदस्यों ने विशेषज्ञों से मुरगुड़ी पहाड़ी पर क्लाइम्बिंग और रैपलिंग का अभ्यास किया। शुक्रवार से 15 सदस्यों को किट के सहारे पहाड़ पर चढ़ने-उतरने का प्रशिक्षण देने का काम शुरू किया गया। इस संबंध में डीएफओ आशीष तिवारी ने इसे पर्यटन क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम बताया। उनका कहना है कि प्रशिक्षण लेने वाले युवक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन और खनिज सम्पदा की निगरानी करने के साथ जंगलों को कटने से बचायेंगे। पर्यटन के लिए वन विभाग और जायका से जुड़कर काम करने वाली संस्था ने जो खाका तैयार किया है उसके तहत ट्रेनिंग के साथ ही युवकों के चाय-नाश्ते, भोजन और आवास की व्यवस्था की जायेगी। इससे समिति की आय बढ़ेगी। फिलहाल टीम ने 15 हजार रुपये खुद जुटाया। किट की व्यवस्था वन विभाग ने की है। प्रशिक्षकों का प्रबंध लैको पॉवर कारपोरेशन ने किया है। उद्घाटन और अभ्यास सत्र के दौरान राकेश तिवारी, रेंजर एसकेएस राठौर, डिप्टी रेंजर राजेन्द्र बहेरा, आशीष पाठक, कमलेश शुक्ल, नीरा शुक्ल, एनएस ओझा, नीरज दूबे, करुवेश शुक्ल व मुरगुड़ी पहाड़ के पुजारी उपस्थित रहे। इनसेट : पर्यटन के लिए अद्भुत है पहाड़ी पर्यटन, रॉक क्लाइम्बिंग और रैपलिंग के लिए मधुवन ग्राम पंचायत के बरहपान में मुरगुड़ी पहाड़ी का दक्षिणी भाग अद्भुत है। इसकी ऊंचाई करीब 520 फुट है। क्लाइम्बिंग के लिए दो सौ फुट की खड़ी पहाड़ी है। यह पहाड़ी महुली के राजा बरियार शाह के नाम से भी पहचान रखती है। पैदल चढ़ने के लिए पहाड़ी का पश्चिमी हिस्सा सरल है। उत्तरी छोर से भी पहाड़ी पर चढ़ाई का आनंद लिया जा सकता है। पहाड़ी पर जाने के लिए दुद्धी बघाड़ृ बरहपान का पक्का मार्ग सबसे सरल है। इसके लिए 13 किमी यात्रा करनी पड़ती है जबकि म्योरपुर से पहाड़ी की दूरी 24 किमी है। पर्यटक मुरगुड़ी से राजा चंडोल जिले की सबसे ऊंची पहाड़ी देख सकते हैं। वहां से 12 किमी दूर चित पहाड़ी और उपेक्षित ग्वाल चारवाहा पत्थर का भी अवलोकन किया जा सकता है। किवदंती है कि यहां गाय चराने ग्वाला शापग्रस्त होकर पत्थर बन गया। पत्थर देखने से लगता है कंबल ओढ़कर कोई सो रहा है।

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