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रेणु के गांव में

पूर्णिया में प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य अधिवेशन में शिरकत करने के दौरान रेणुजी के गांव जाना संभव हुआ। औराही हिंगना, रानीगंज के इलाके (मैला आंचल  में मेरीगंज) को, जहां फणीश्वरनाथ रेणु का पुश्तैनी घर है, एक बार देखने की ललक हर साहित्यप्रेमी में होती है। यह जानकर खुशी हुई कि  रेणुजी के परिजन उनकी विरासत को समझ रहे हैं, और उसे संजोने में लगे हैं।

राज्य सरकार भी बिहारी अस्मिता के निर्माण में, महान रचनाकार के सम्मान में और धानुक-मंडल जाति के वोट वैंक की हिफाजत के मिश्रित भाव में उदार दिख रही है। औराही हिंगना में ‘रेणु स्मृति भवन’ के लिए एक करोड़ रुपये की व्यवस्था हो चुकी है। इस स्मृति भवन का खांचा रेणुजी के छोटे बेटे ने खींच रखा है। इसमें लाइब्रेरी होगी, सेमिनार हॉल होगा, गेस्ट रूम होंगे, डिजिटल संग्रहालय आदि होगा।

बहरहाल, औराही हिंगना की ओर जाते हुए नेशनल हाइवे शानदार है, हालांकि रेणु के गांव तक जाने में लगभग तीन किलोमीटर लंबी सड़क पर ‘सुशासन’ की मेहरबानी नहीं हुई है। हां, गांव तक जाने की दो सड़कों में से एक पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का नाम अच्छे से खुदा है, लेकिन दूसरी सड़क पर, जिससे हम हिचकोले खाते रेणु के गांव पहुंचे, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की पट्टी तो लगी है, पर सड़क गायब है।

रेणुजी के घर में अब उनके समय के अभाव नहीं हैं, लेकिन उनके गांव-इलाके में जातियां उपन्यास के कथा काल की भी हकीकत थीं और आज की भी। जाति-समीकरण व जातिगत व्यवस्था अब भी वहां जिंदा है।
तहलका वेब पोर्टल में संजीव चंदन

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