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बजट में चुनौतियों से निपटने का खाका नहीं: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम बजट को मात्र लेखा जोखा बताते हुए कहा है कि इसमें देश के सामने उत्पन्न चुनौतियों से निपटने की कोई तस्वीर नहीं पेश की गई और यह अर्थव्यवस्था को उदारीकरण के बजाय उधारीकरण के गर्त में ले जाएगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पार्टी की नियमित ब्रीफिंग में बजट पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि देश की आर्थिक हालत एक बार फिर 1991 जैसी है। यह स्थिति संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की नीतियों का नतीजा है।

उन्होंने कहा कि स्थिति इस तरह की है कि यदि यह कहा जाए कि हम नरक में सड़ रहे हैं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसके बावजूद सरकार ने खर्च घटाने के कोई उपाय नहीं किए हैं। सरकार ने मनरेगा जैसी अपनी महत्वपूर्ण योजना के लिए आवंटन राशि कम की है जिससे यह पता चलता है कि यह योजना विफल हो गई है।
 
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के सामने वित्तीय और राजस्व घाटे पर अंकुश लगाने, महंगाई रोकने, आर्थिक विकास दर बढ़ाने और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने जैसी चुनौतियां हैं लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिनसे इन चुनौतियों से निपटा जा सके।
 
सिन्हा ने कहा कि जिस तरह की तस्वीर पेश की गई है उससे साफ है कि सरकार का एक तिहाई खर्च उधार से चलेगा। यह बजट देश को उदारीकरण नहीं उधारीकरण की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में दावा किया था कि विकास दर दहाई तक पहुंच जाएगी लेकिन स्थिति सबके सामने है। उन्होंने कहा कि इस बार के प्रावधानो से अर्थव्यवस्था में कोई गति नहीं आएगी और आने वाले दिनों मे आर्थिक संकट और गहराएगा।
 
सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2010-11 में वित्तीय घाटा 5.9 प्रतिशत रहा और अब वित्तमंत्री ने करों का जो भयानक बोझ डाला है उससे आम आदमी कुल। लाख 76 हजार करोड रूपए का कर देगा जिससे उसका जीवन दूभर हो जाएगा और वित्तीय घाटा फिर भी 5.1 प्रतिशत रहेगा।

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